आपने बॉडीगॉर्ड मूवी देखा होगा उसमे सलमान का काम आपने देखा होगा और उसके काम को देखकर एक्साइटमेन्ट हुआ होगा और संभावना के साथ-साथ चैलेंजेस भी दिखे होंगे। आइए जानते आज इस करियर के बारे में।
आज हमसे हर कोई अक्सर डकैती, लूट , किडनैपिंग और अन्य प्रकार के हिंसक वारदातों का शिकार हो जाता है। यही कारण है कि बड़ी कम्पनियां, बैंक, ज्वेलरी शोरूम और अन्य बड़े संस्थानों में पुलिस की चौकसी से ज्यादा निजी सिक्योरिटी एजेंसी के गॉर्ड पर भरोसा किया जाता है। असुरक्षा के खौफ और अपने जान-माल के साथ परिवारजनों की सलामती के लिए बड़े -बड़े बिजनेसमैन ऐसी सिक्योरिटी एजेंसियों पर पैसा खर्च करना गलत नही मानते हैं। इन्हीं सब कारणों से पिछले दस सालों में सिक्योरिटी एजेंसियों की संख्या और इनके बिजनेस में जबरदस्त इजाफा हुआ है। एक अनुमान के मुताबिक आज सिक्योरिटी एजेंसियों का कारोबार 50 हजार करोड़ से ज्यादा का है।
ट्रेनिंग
हालाकिं सैन्य बलों अथवा अर्ध्द सैन्य बलों के बैकग्राउंड वाले लोगों को ही सिक्योरिटी एजेंसियों में काम करने के मौके मिलते हैं, पर आज बहुत सारे संस्थान हैं जो इस पेशे से जुड़ी जरुरी ट्रेनिंग देते हैं। ऐसे संस्थानों में फूल टाइम और शार्ट टर्म कोर्सेज कराए जाते हैं।
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एजेंसियों का स्पेशलाइजेशन
सिक्योरिटी एजेंसियों की बात की जाती है तो सहज ही सिक्योरिटी गार्ड की तस्वीर जेहन में उभर आती है। यही कारण है कि युवाओं की करियर प्राथमिकताओं में सिक्योरिटी प्रोफेशन का नाम तक नहीं आता। पर वास्तविकता में यह प्रोफेशन भी आवश्यकता के अनुसार के तरह के स्पेशलाइजेशन में बंट चुका है। इसमें युद्ध कौशल की हाई टेक टेक्नोलॉजी से लेकर आतंकवादी हमलों तक से टक्कर ले सकने में सक्षम जाबांजो तक कि जरूरत हो सकती है। इस क्रम में सिक्योरिटी के महत्वपूर्ण फील्डों के आधार पर निम्न वर्गों के स्पेशलाइजेशन का उल्लेख किया जा सकता है।
वीवीआईपी की सिक्योरिटी:
पॉलिटिशियन्स और गवर्नमेंट ऑफिसर्स को तो पुलिस और ब्लैक कमांडो सरीखी सुरक्षा आधिकारिक तौर पर मिल जाती है, पर फिल्मी हस्तियों, बड़े बिजनेसमैनों और अमीर परिवारों को निजी तौर पर ब्लैक कमांडो जैसी ट्रेनिंग प्राप्त सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स या बाउंसर्स की सेवाएं एजेंसी से लेनी पड़ती हैं। ये सिक्योरिटी ऑफिसर बॉडी गॉर्ड की भूमिका निभाने के अतिरिक्त, घर और ऑफिस की सिक्योरिटी व्यवस्था को चाक-चौबंद रखते हैं।
कैश वैन सिक्योरिटी सर्विस:
देश भर के एटीएम में कैश पहुंचाने का जिम्मा अब ऐसी सिक्योरिटी एजेंसियों के हवाले किया जा चुका है, जो अपनी कैश वैन और सिक्योरिटी स्टाफ़ के साथ कैश की रकम विभिन्न एटीएम मशीनों व बैंकों की ब्रांचों तक सुरक्षित पहुंचाने का कॉन्ट्रैक्ट लेते हैं।
इंडस्ट्री और कॉरपोरेट सेक्टर की सुरक्षा:
इसमें सुरक्षा के कई लेवल शामिल होते हैं। ये गेट से लेकर ऑफिस के अन्दर तक फैले होते हैं और सबकी जिम्मेदारियां भी उसी क्रम में बंटी होती हैं। सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से कैंपस के चप्पे-चप्पे पर इनकी नजर होती है। वॉकी-टॉकी से लैस ये लोग जरा सा भी खतरा महसूस करने पर तुरंत एक्टिव हो जातें हैं।
इसमें सुरक्षा के कई लेवल शामिल होते हैं। ये गेट से लेकर ऑफिस के अन्दर तक फैले होते हैं और सबकी जिम्मेदारियां भी उसी क्रम में बंटी होती हैं। सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से कैंपस के चप्पे-चप्पे पर इनकी नजर होती है। वॉकी-टॉकी से लैस ये लोग जरा सा भी खतरा महसूस करने पर तुरंत एक्टिव हो जातें हैं।
एयर सिक्योरिटी मार्शल/ कमांडो:
हवाई जहाज को हाईजैक होने से बचाने के उद्देश्य से बड़ी बड़ी एयरलाइन्स कम्पनियां हर विमान में यात्रियों के बीच ही अपने एयर मार्शल भी भेजतीं हैं।
क्यों बढ़ रहा है सिक्योरिटी एजेंसियों का कारोबार
देशभर में 20-30 हजार सिक्योरिटी एजेंसियां कार्यरत हैं और इनसे 50-70 लाख जुड़े हुए हैं। पर अधिकांश ऐसी एंजेसियों के असंगठित फील्ड में काम होने के कारण इनकी सही संख्या और इसमें रोजगार पाने वाले लोगों की सटीक संख्या का आकलन कर पाना मुश्किल होता है। प्रतिष्ठित और प्रोफेसनल्स द्वारा चलाई जा रही पुरानी एजेंसियों की सेवाएं अपेक्षाकृत महंगी होने के कारण इनके कस्टमर कारपोरेट घराने, सरकारी विभाग/संस्थान, बैंकिंग/फाइनेंस से जुड़ी कंपनियां, होटल आदि होतें हैं। जिनके गार्ड्स भी बाकायदा अच्छे डील-डौल वाले होते हैं। इनको गार्ड्स की ड्यूटी से जुड़ी ट्रेनिंग ट्रेंड प्रोफेसनल्स द्वारा दी जाती है, जिसमें ड्यूटी के वक्त चौकन्ना रहने के साथ-साथ अपराधियों को काबू करने से सम्बंधित कला का व्यवहारिक ज्ञान भी शामिल है। इनसे ऊपर सिक्योरिटी सुपरवाइजर होतें हैं, जो गार्ड्स और उनके कामकाज पर तीखी नजर रखते हैं। इन सबके ऊपर सिक्योरिटी मैनेजर्स होतें हैं।
इसकी वजह:
● बढ़ते आतंकी हमले
● पुलिस फोर्स की कमी
● बढ़ता शहरीकरण
● शॉपिंग मॉल की तेजी से बढ़ती संख्या
● क्राइम के केसेज लगातार बढ़ते जाना
● प्राइवेट टाउनशिप का बड़े पैमाने पर बिल्डर्स द्वारा डेवेलपमेंट
● पुलिस फोर्स की कमी
● बढ़ता शहरीकरण
● शॉपिंग मॉल की तेजी से बढ़ती संख्या
● क्राइम के केसेज लगातार बढ़ते जाना
● प्राइवेट टाउनशिप का बड़े पैमाने पर बिल्डर्स द्वारा डेवेलपमेंट
सिक्योरिटी प्रोफेशनल बनने के लिए जरूरी स्किल्स
● एजुकेटेड होना ही काफी नहीं हैं, बल्कि प्रोमोशन के लिए भी उच्च शिक्षा जरूरी मानी जाती हैं।
● आकर्षक और गठीला शरीर तथा ऊंची कद-काठी वाली पर्सनालिटी
● मैनेजमेंट के बैकग्राउंड के लोगों के लिए सिक्योरिटी प्लानिंग का काम करना आसान होता है।
● एनसीसी अथवा इसी तरह की ट्रेनिंग प्राप्त युवाओं को वरीयता दी जाती है।
सेल्फ एम्प्लॉयमेंट के भी मौके
इस प्रोफेसन में काम का एक्सपीरियंस हासिल करने के बाद काफी कम पूंजी निवेश के साथ अपनी सिक्योरिटी एजेंसी भी खोली जा सकती है। शुरुआत में पर्सनल जान-पहचान से कॉन्ट्रैक्ट मिल सकता है उसके बाद धीरे-धीरे नाम होने पर कई सारे कॉन्ट्रैक्ट्स मिल सकतें हैं। यह सिक्योरिटी का मामला है तो किसी भी तरह की लापरवाही से सबकुछ बर्बाद कर सकता है।
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Team Akanksha
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