Saturday, 26 May 2018

सिक्योरिटी देकर कैरियर को करें सिक्योर



आपने बॉडीगॉर्ड मूवी देखा होगा उसमे सलमान का काम आपने देखा होगा और उसके काम को देखकर एक्साइटमेन्ट हुआ होगा और संभावना के साथ-साथ चैलेंजेस भी दिखे होंगे। आइए जानते आज इस करियर के बारे में।

आज हमसे हर कोई अक्सर डकैती, लूट , किडनैपिंग और अन्य प्रकार के हिंसक वारदातों का शिकार हो जाता है। यही कारण है कि बड़ी कम्पनियां, बैंक, ज्वेलरी शोरूम और अन्य बड़े संस्थानों में पुलिस की चौकसी से ज्यादा निजी सिक्योरिटी एजेंसी के गॉर्ड पर भरोसा किया जाता है। असुरक्षा के खौफ और अपने जान-माल के साथ परिवारजनों की सलामती  के लिए बड़े -बड़े बिजनेसमैन ऐसी सिक्योरिटी एजेंसियों पर पैसा खर्च करना गलत नही मानते हैं। इन्हीं सब कारणों से पिछले दस सालों में सिक्योरिटी एजेंसियों की संख्या और इनके बिजनेस में जबरदस्त इजाफा हुआ है। एक अनुमान के मुताबिक आज सिक्योरिटी एजेंसियों का कारोबार 50 हजार करोड़ से ज्यादा का है।

ट्रेनिंग

हालाकिं सैन्य बलों अथवा अर्ध्द सैन्य बलों के बैकग्राउंड वाले लोगों को ही सिक्योरिटी एजेंसियों में काम करने के मौके मिलते हैं, पर आज बहुत सारे संस्थान हैं जो इस पेशे से जुड़ी जरुरी ट्रेनिंग देते हैं। ऐसे संस्थानों में फूल टाइम और शार्ट टर्म कोर्सेज कराए जाते हैं।


सिक्योरिटी देकर कैरियर को करें सिक्योर

एजेंसियों का स्पेशलाइजेशन

सिक्योरिटी एजेंसियों की बात की जाती है तो सहज ही सिक्योरिटी गार्ड की तस्वीर जेहन में उभर आती है। यही कारण है कि युवाओं की करियर प्राथमिकताओं में सिक्योरिटी प्रोफेशन का नाम तक नहीं आता। पर वास्तविकता में यह प्रोफेशन भी आवश्यकता के अनुसार के तरह के स्पेशलाइजेशन में बंट चुका है। इसमें युद्ध कौशल की हाई टेक टेक्नोलॉजी से लेकर आतंकवादी हमलों तक से टक्कर ले सकने में सक्षम जाबांजो तक कि जरूरत हो सकती है। इस क्रम में  सिक्योरिटी के महत्वपूर्ण फील्डों के आधार पर निम्न वर्गों के स्पेशलाइजेशन का उल्लेख किया जा सकता है।

वीवीआईपी की सिक्योरिटी: 
पॉलिटिशियन्स और गवर्नमेंट ऑफिसर्स को तो पुलिस और ब्लैक कमांडो सरीखी सुरक्षा आधिकारिक तौर पर मिल जाती है, पर फिल्मी हस्तियों, बड़े बिजनेसमैनों और अमीर परिवारों को निजी तौर पर ब्लैक कमांडो जैसी ट्रेनिंग प्राप्त सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स या बाउंसर्स की सेवाएं एजेंसी से लेनी पड़ती हैं। ये सिक्योरिटी ऑफिसर बॉडी गॉर्ड की भूमिका निभाने के अतिरिक्त, घर और ऑफिस की सिक्योरिटी व्यवस्था को चाक-चौबंद रखते हैं।

कैश वैन सिक्योरिटी सर्विस: 
देश भर के एटीएम में कैश पहुंचाने का जिम्मा अब ऐसी सिक्योरिटी एजेंसियों के हवाले किया जा चुका है, जो अपनी कैश वैन और सिक्योरिटी स्टाफ़ के साथ कैश की रकम विभिन्न एटीएम मशीनों व बैंकों की ब्रांचों तक सुरक्षित पहुंचाने का कॉन्ट्रैक्ट लेते हैं।

इंडस्ट्री और कॉरपोरेट सेक्टर की सुरक्षा:
इसमें सुरक्षा के कई लेवल शामिल होते हैं। ये गेट से लेकर ऑफिस के अन्दर तक फैले होते हैं और सबकी जिम्मेदारियां भी उसी क्रम में बंटी होती हैं। सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से कैंपस के चप्पे-चप्पे पर इनकी नजर होती है। वॉकी-टॉकी से लैस ये लोग जरा सा भी खतरा महसूस करने पर तुरंत एक्टिव हो जातें हैं।

एयर सिक्योरिटी मार्शल/ कमांडो: 
हवाई जहाज को हाईजैक होने से बचाने के उद्देश्य से बड़ी बड़ी एयरलाइन्स कम्पनियां हर विमान में यात्रियों के बीच ही अपने एयर मार्शल भी भेजतीं हैं।

क्यों बढ़ रहा है सिक्योरिटी एजेंसियों का कारोबार

देशभर में 20-30 हजार सिक्योरिटी एजेंसियां कार्यरत हैं और इनसे 50-70 लाख जुड़े हुए हैं। पर अधिकांश ऐसी एंजेसियों के असंगठित फील्ड में काम होने के कारण इनकी सही संख्या और इसमें रोजगार पाने वाले लोगों की सटीक संख्या का आकलन कर पाना मुश्किल होता है। प्रतिष्ठित और प्रोफेसनल्स द्वारा चलाई जा रही पुरानी एजेंसियों की सेवाएं अपेक्षाकृत महंगी होने के कारण इनके कस्टमर कारपोरेट घराने, सरकारी विभाग/संस्थान, बैंकिंग/फाइनेंस से जुड़ी कंपनियां, होटल आदि होतें हैं। जिनके गार्ड्स भी बाकायदा अच्छे डील-डौल वाले होते हैं। इनको गार्ड्स की ड्यूटी से जुड़ी ट्रेनिंग ट्रेंड प्रोफेसनल्स द्वारा दी जाती है, जिसमें ड्यूटी के वक्त चौकन्ना रहने के साथ-साथ अपराधियों को काबू करने से सम्बंधित कला का व्यवहारिक ज्ञान भी शामिल है। इनसे ऊपर सिक्योरिटी सुपरवाइजर होतें हैं, जो गार्ड्स और उनके कामकाज पर तीखी नजर रखते हैं। इन सबके ऊपर सिक्योरिटी मैनेजर्स होतें हैं।

इसकी वजह:

●  बढ़ते आतंकी हमले
●  पुलिस फोर्स की कमी
●  बढ़ता शहरीकरण
●  शॉपिंग मॉल की तेजी से बढ़ती संख्या
●  क्राइम के केसेज लगातार बढ़ते जाना
●  प्राइवेट टाउनशिप का बड़े पैमाने पर बिल्डर्स द्वारा डेवेलपमेंट

    सिक्योरिटी प्रोफेशनल बनने के लिए जरूरी स्किल्स

●  एजुकेटेड होना ही काफी नहीं हैं, बल्कि प्रोमोशन के लिए भी उच्च शिक्षा जरूरी मानी जाती हैं।
●  आकर्षक और गठीला शरीर तथा ऊंची कद-काठी वाली पर्सनालिटी
●  मैनेजमेंट के बैकग्राउंड के लोगों के लिए सिक्योरिटी प्लानिंग का काम करना आसान होता है।
●  एनसीसी अथवा इसी तरह की ट्रेनिंग प्राप्त युवाओं को वरीयता दी जाती है।

सेल्फ एम्प्लॉयमेंट के भी मौके

इस प्रोफेसन में काम का एक्सपीरियंस हासिल करने के बाद काफी कम पूंजी निवेश के साथ अपनी सिक्योरिटी एजेंसी भी खोली जा सकती है। शुरुआत में पर्सनल जान-पहचान से कॉन्ट्रैक्ट मिल सकता है उसके बाद धीरे-धीरे नाम होने पर कई सारे कॉन्ट्रैक्ट्स मिल सकतें हैं। यह सिक्योरिटी का मामला है तो किसी भी तरह की लापरवाही से सबकुछ बर्बाद कर सकता है।

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Team Akanksha

Sunday, 13 May 2018

प्रोडक्ट डिजाइनर: प्रोडक्शन फील्ड में उभरता हुआ नया कैरियर


आपने कई बार जब बाजार में जातें है तो कई सारे प्रोडक्ट्स जैसे बच्चों के खिलौने से लेकर बड़ी बड़ी कारों की डिजाइन को देखकर आप चकित हो जातें हैं। आप जिधर भी नजर दौडाएंगे आपको एक से एक डिजाइनर और स्टाइलिश प्रोडक्ट मिल जायेंगे। ये सब चकित कर देने  वाले प्रोडक्ट्स प्रोडक्ट डिजाइनर बनातें हैं। जो अपनी इमैजिनेशन पॉवर और ब्यूटिसेन्स की बदौलत इन सारे प्रोडक्ट्स को बनातें हैं। इसलिए इंजीनियरिंग के इस ब्रांच का दबदबा बढ़ता जा रहा है और स्टूडेंट्स का भी रुझान इस ओर बढ़ रहा है।

वर्क प्रोफाइल

प्रोडक्ट डिजाइनर कमर्शियल प्रोडक्शन फर्मों के लिए प्रोडक्ट्स और मटेरियल डिजाइन करते हैं। किसी भी प्रॉडक्ट को डिजाइन करने से पहले ये उसकी विजुअल अपील और व्यवहारिक उपयोग का पूरा ध्यान रखतें हैं। एक प्रोडक्ट डिजाइनर को कार, डोमेस्टिक उपकरण, कंप्यूटर, मेडिकल उपकरण, ऑफिस या इंटरटेनमेंट के उपकरण, खिलौने आदि भी डिजाइन करना पड़ता है। उन्हें रिसर्च टीम, एडवरटाइजिंग टीम और प्रोडक्शन मैनेजर से बातचीत करने के अलावा ग्राफिक डिजाइनर के साथ भी करना होता है।

प्रोडक्ट डिजाइनर: प्रोडक्शन फील्ड में उभरता हुआ नया कैरियर

'स्किल इस इम्पॉर्टेन्ट'

प्रोडक्ट डिजाइनर को आर्टिस्टिक होने के साथ-साथ तार्किक रूप से सोचने वाला भी होना चाहिए। अगर आपके पास कुछ अलग और यूनिक आइडियाज होंगे, तभी अपनी अलग पहचान बना सकेंगे। इसी तरह आपकी ऑब्जरवेशन स्किल और विज़ुअल इमेजिनेशन भी बेहतरीन होनी चाहिए।आपको ड्राइंग के मीडियम से अपने आइडिया को व्यक्त करने और कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के प्रोडक्शन और मार्केटिंग की समझ भी होनी चाहिए।

एलिजिबिलिटी एन्ड कोर्स

अगर आपके पास आर्किटेक्चर या इंजीनियरिंग में डिग्री होगी तो आप आईआईटी से इंडस्ट्रियल डिजाइनिंग में मास्टर डिग्री हासिल कर सकते हैं। इससे कैरियर के विकास बेहतर रहेगा। वैसे साइंस स्ट्रीम से 12वीं करने वाले नेशनल इंस्टीट्यूट डिजाइन का कोर्स कर प्रोडक्ट डिजाइनिंग के क्षेत्र में आ सकते हैं। हां, इसके लिए जेईई की परीक्षा पास करनी होगी। प्रोडक्ट डिजाइनर सेरामिक और फर्नीचर डिजाइन में स्पेशलाइजेशन भी कर सकते हैं। वैसे कई प्राइवेट इंस्टिट्यूट प्रोडक्ट डिजाइन से सम्बंधित कोर्स संचालित कर रहे हैं।

मौके और डिमांड

प्रोडक्शन फर्मों के डिजाइन डिपार्टमेंट में प्रोडक्ट डिजाइनरों  की अच्छी मांग होती है। आप इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट डिजाइनर, वॉच डिजाइनर, फुटवियर डिजाइनर, डिजिटल डिजाइनर आदि के रूप में कैरियर शुरू कर सकतें हैं। इसके अलावा चाहें तो कन्सल्टिंग फर्मों में भी काम कर सकतें हैं। जो लोग सेरामिक्स में स्पेशलाइजेशन रखतें हैं, उनके लिए टेबल वेयर, सैनिटरी वेयर, पॉटरी, डेकोरेटिव पोर्सलीन जैसे इंडस्ट्री में ढेरों मौके अवेलेबल हैं। बड़ी-बड़ी कार कम्पनियां समय-समय पर प्रोडक्ट डिजानरों की भर्ती करती रहतीं हैं। इस समय जब मेक इन इंडिया पर सरकार का इतना जोर है तो भारतीय प्रोडक्ट डिजाइनरों का इम्पॉर्टेन्ट और भी बढ़ जाता है।
अगर आप एंटरप्रेन्योरशिप में भी जातें है तो भी लम्बे समय के लिए फायदेमंद हो सकता है।

चैलेंजेस

एक डिजाइनर हमेशा इस तरह डिजाइन करता है जैसे वह खुद के लिए नही बल्कि अपने काम को अपने क्लाइंट के लिए करता है। साथ ही इस क्षेत्र में सक्सेस हासिल करने के लिए जरूरी है कि आप कुछ खास, नया और आकर्षक पेश करें।

इनकम

आज इस इंडस्ट्री में एनुअली 6-8 लाख रुपये के बीच हो सकता है। कुछ सालों के एक्सपेरिएंस के साथ-साथ आपके इनकम में बढ़ जाएगी। वैसे फॉरेन में इण्डियन डिजाइनर की काफ़ी डिमांड है।

टॉप इंस्टिट्यूट्स

इंडस्ट्रियल डिजाइन सेंटर, आईआईटीबी, मुम्बई
वेबसाइट: www.idc.iitb.ac.in

मैनेजमेंट इंस्टीटूट ऑफ डिजाइन, पालदी, अहमदाबाद
वेबसाइट: www.mada.ac.in

सिंबायोसिस इंस्टिट्यूट ऑफ डिजाइन, पुणे
वेबसाइट: www.sid.edu.in

● एमआईटी इंस्टीटूट ऑफ डिजाइन, पुणे
वेबसाइट: www.mitpune.com

डिपार्टमेंट ऑफ डिजाइन, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी(आईआईटी), गुवाहटी
वेबसाइट: www.iitg.ac.in

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Team Akanksha

जॉब कंसल्टेंसी: नए समय का नया बिजनेस


सुकन्या और नीरज दिन भर इंटरव्यू लेते रहतें है लेकिन उनमें से एक भी कैंडिडेट उनकी कम्पनी में काम नही करता है। बल्कि सारे कैंडिडेट किसी और कम्पनी में जाते हैं। दोनों इस काम से काफी पैसा भी कमाते हैं।वो दोनों इस काम को काफी इंजॉय भी करतें है क्योंकि इसमें वो कम्पनी और कैंडिडेट दोनो की हेल्प करतें हैं।


जॉब कन्सलटेंसी को स्टफिंग या टेम्परेरी एजेंसी भी कहा जाता है। इसमें किस-किस जगह नौकरी है पता करके उसके कम्पनी के लिए परफेक्ट कैंडिडेट की तलाश की जाती है, उनका इंटरव्यू भी लिया और स्क्रूटनी भी किया जाता है। जॉब कन्सलटेंसी का सीधा सा काम होता है मार्केट की कम्पनियों और संस्थानों में खाली पोस्ट पर 
परफेक्ट कैंडिडेट भेजना।

कैसे कर सकतें हैं शुरुआत

इस इंडस्ट्री का फील्ड भी काफी बड़ा है। जैसे टेक्निकल से लेकर नॉन टेक्निकल और परमानेंट से लेकर टेम्पररी तक। इसलिए जब भी स्टार्ट करें तो किसी एक स्पेशल फील्ड पहले फोकस करके उस पर कमांड करें। साथ ही रजिस्ट्रेशन और लीगल पेपर्स, लाइसेंस आदि भी करा लें।
इसके बाद आप अपने पसंदीदा फील्ड के बारीकियों के बारे में समझ लें। जैसे उस फील्ड में क्या-क्या डिमांड है, कौन-कौन सी एजेंसियां अभी सर्विस दे रही हैं, क्या अप-डाउन्स हैं। सारी चीजें अच्छे से समझ लें फिर कदम बढ़ाएं। क्योंकि एक बेहतर रिसर्च वर्क एक बेहतर कम्पनी की नींव होता है।

एजेंसी स्टार्ट करने में लागत

पहर बिजनेस की तरह यह बिजनेस भी एक स्टार्टिंग इन्वेस्टमेंट चाहता है। जैसे जगह पर खर्च, इम्प्लॉइज पर खर्च, इन्श्योरेंस, ऑफिस सेट अप जैसे एक्सपेंस का एक पूरा कैलकुलेशन कर लें।इसके लिए आप लोन भी ले सकतें हैं और लोन के लिए जरूरी है कि आप अपना पेपर वर्क मजबूत रखें। क्योंकि शुरुआत में 2-3 लाख रुपये तक लग सकते हैं। क्योंकि ऑफिस में कम्प्यूटर, फर्नीचर, शुरुआती कुछ खर्च के लिए बजट और सारे बेसिक काम होते हैं।

सही प्लेस और सही स्टाफ का करें सिलेक्शन

कहतें है सही जगह का चुनाव कर लेना बिजनेस के लिए सफलता की पहली सीढ़ी होती है। इसके लिए जगह ऐसी होनी चाहिए, जो लोगों के नजर में आ सकें और आसानी से नौकरी देने वाली कम्पनी और कैंडिडेट्स वहां पहुंच सके। एक बिजनेस करने जा रहे तो जाहिर सी बात है आपको कुछ लोगों की जरूरत बिल्कुल पड़ेगी। इसके लिए नेटवर्किंग, एडवरटाइजिंग के जरिये, चाहे जैसे करें स्टाफ का सेलेक्शन बहुत ध्यान से करें और उनका पूरा डीटेल भी अपने पास रखें।इस बात की पूरी तसल्ली कर लें कि वह आपके वर्क स्टाइल को सूट करतें हैं या नही। एक एक्सपीरिएंसड स्टाफ एक्सपेक्टेड कस्टमर से कॉन्टैक्ट करने, इंटरव्यू करने और जॉब के लिए कैंडिडेट्स का आकलन करने का कार्य बखूबी करता है।

मार्केटिंग प्लान हो जबरदस्त

मार्केटिंग का प्लान करने से पहले टारगेटेड क्लाइंट्स का एक लिस्ट बना लें। इसमें अपने पर्सनल कॉन्टैक्ट,  उन कम्पनियों की लिस्ट, जिनके लिए आप शुरुआत में काम करेंगे। इसके लिए इंटरनेट, सोशल मीडिया पर लिंक्डइन का का भरपूर मदद ले सकते हैं। इसके बाद शुरुआती ई-मेल कम्पनियों को भेजकर अपने सर्विसेज के बारें में बता दें जिससे वो कम्पनी में होने वाली जॉब नोटिफिकेशन आपके साथ भी शेयर कर दिया करें। आप अपना एडवरटीजमेन्ट न्यूजपेपर, मैगजीन में देकर, सोशल साइट्स पर नोटिफिकेशन डालकर, सोशल मीडिया पर एड चलकर कर सकतें हैं।

योग्यता और स्किल

इस इंडस्ट्री में किसी विशेष डिग्री की जरूरत नही होती है। लेकिन आपके कुछ बातों का होना बहुत जरूरी हैं।

● इंडस्ट्री की समझ: जिस फील्ड में आप प्लेसमेंट आप कराना चाहते। है उसकी आपको अच्छी समझ होनी चाहिए।

● कम्युनिकेशन स्किल: आपकी कम्युनिकेशन बहुत परफेक्ट होनी चाहिए।

जॉब कंसल्टेंसी: नए समय का नया बिजनेस
● लोक-व्यवहार(मैनर्स एन्ड एटिकेट्स): आप किसी का इंटरव्यू लेकर किसी कम्पनी में आप उस कैंडिडेट को जॉब के लिए रिकमेंड करतें हैं। इसलिए आपको लोगों के व्यवहार में बहुत अच्छे ढंग से पता होना चाहिए।

● कूलनेस: कई बार दिनभर काम करने के बाद रिजल्ट उस तरह नही आएगा, कम्पनी का प्रेशर होगा, कैंडिडेट का एटीट्यूड, कम्पटीशन का दबाव आपको परेशान कर सकता है इसलिए आपको कूल बनाकर रखना होगा।

इनकम

यह इंडस्ट्री पूरी तरह से आपके कैंडिडेट के कम्पनी में जॉब लग जाने के पर निर्भर करती है। बेसिकली कन्सलटेंसी अपने कैंडिडेट से चार्ज करती हैं। 
शुरुआत में  लगन से कम करके एक अच्छी आमदनी कमा सकतें हैं उसके बाद अनुभव होने और कॉन्टेक्ट्स बनने के बाद बहुत सारा पैसा कमा सकतें हैं।

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Team Akanksha

Friday, 11 May 2018

ट्यूशन-कोचिंग आज का उभरता हुआ कैरियर



ट्यूशन की सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें कोई पूंजी नही लगानी पड़ती और न ही बहुत ज्यादा समय देने की आवश्यकता पड़ती है। कोई भी ट्यूटर अपने हिसाब से समय तय कर सकता है और अपनी शैक्षणिक योग्यता के अनुसार छात्र-छात्राओं का चयन कर सकता है....


एक समय था जब ट्यूशन वही लोग लेते थे जो कड़की-सड़की में रहते थे, या पार्ट टाइम पढ़ाकर पैसे कमा लेना चाहते थे। मगर अब जमाना पूरा बदल गया है. ट्यूशन और कोचिंग इस दौर में बाकायदा का प्रोफेशन बन गए हैं। ये ऐसे काम हो गए हैं जिसमे पैसा तो है सम्मान भी बहुत ज्यादा है आज हर किसी को अपने बच्चों के लिए , हर किसी महत्वाकांक्षी इंसान को बेस्ट ट्यूटर या कोच चाहिए। इसी कारण ट्यूटर या कोच का सोसाइटी में वैल्यू बढ़ने लगा है।


ट्यूशन-कोचिंग आज का उभरता हुआ कैरियर
दिनोदिन बढ़ता ग्राफ

यहां यह समझ लेना जरूरी है कि ट्यूशन का दायरा छोटा होता है, जबकि कोचिंग क्लास का दायरा बहुत बड़ा है। ट्यूशन की सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें कोई कैपिटल नही लगानी पड़ती और ज्यादा समय देने की भी जरूरत भी नही पड़ती है। कोई भी ट्यूटर ट्यूशन के लिए अपने हिसाब से समय तय कर सकता है। कुछ साल पहले अमेरिका की प्रतिष्ठित मैगजीन 'टाइम' ने एक बड़ा आर्टिकल पब्लिश किया था, जिसमे बताया था कि किस तरह एशियाई बच्चों के पैरेंट्स अपनी संतानों की ट्यूशन को तवज्जोह दे रहे हैं। ट्यूशन के दो तरीके हैं। एक तो यह आपको घर जाकर बच्चों को पढ़ाना पड़ता है और दूसरा यह कि अपने घर पर ही बुलाकर बच्चों को पढ़ाना रहता है। ट्यूशन में आप अपने एजुकेशनल एलिजिबिलिटी के हिसाब से स्टूडेंट्स को चुन सकते हैं। अगर आप ग्रेजुएट हैं तो आप 10 वीं तक पढ़ा सकते हैं और अगर पोस्टग्रेजुएट हैं तो 12वीं के अलावा ग्रेजुएट लेवल के स्टूडेंट्स को पढ़ा सकतें है। आजकल ट्यूशन की आउटसोर्सिंग भी होने लगी है मतलब आप घर से बैठे-बैठे ही बाहर के किसी भी स्टूडेंट को पढ़ा सकतें हैं। इससे आपको अच्छा-खासा पैसा मिल सकता है।
ट्यूशन एक ऐसा फील्ड है जिसमें पैसा आपकी मेहनत और आपके समय पर निर्भर करता है। जितने घंटे समय आप मेहनत करेंगे उतनी ही आपकी इनकम हो सकती है। मुंबई एवं दिल्ली जैसे शहरों में तो घंटे के हिसाब से ट्यूटर को पैसे मिलते हैं। इन शहरों में 12वीं क्लास के स्टूडेंट को 1 घण्टा साइंस, मैथमेटिक्स और इंग्लिश पढ़ाने के लिए 4 से 5 हजार रुपये महीने तक मिलते हैं। अगर अपने घर बुलाकर भी पढाते हैं तो भी हजारों रुपए कमा सकतें हैं। छोटे शहरों में भी अगर ट्यूशन दिया जाए तो भी 20,000  तक कमाया जा सकता है।

एक्सपीरियंस देता है बहुत सारा मौका

ट्यूशन एक ऐसा फील्ड जिसमें एक्सपीरियंस बहुत मैटर करता है। शुरुआत में पढ़ाने के लिए आपको पढ़ना पड़ता है लेकिन जैसे-जैसे अनुभव हो जाएगा वैसे-वैसे इसकी जरूरत कम हो जाएगी। अगर सिलेबस बदल रहा है तो उसके हिसाब से आपको भी बदलना रहता है। पढ़ाने से आपके अंदर काफी निखार आ जाता है जिससे किसी भी कम्पटेटिव एग्जाम में बैठने पर आपको काफी फायदा मिलता है। मेहनत और लगन से काम करते रहने के बाद एक सफल ट्यूटर बन सकते। हैं।

कैसे होता है काम

कोचिंग क्लास का कांसेप्ट ट्यूशन से एकदम अलग होता है। ट्यूशन में जहां एक एक पर्सन ही ट्यूशन देता है और प्रायः घर-घर जाकर ट्यूशन लेता है। वहीं किसी भी कोचिंग क्लास का प्रायः विशाल कैंपस होता है। इसमें कैपिटल लगाने की भी जरूरत पड़ती है। ऐसे में सेंटर्स पर अलग-अलग सब्जेक्ट के टीचर्स अपॉइंट किये जाते हैं। इन सेंटरों पर 10वीं और 12वीं के साथ-साथ इंजीनियरिंग, डॉक्टरी, सीए और मैनेजमेंट जैसे बड़े कोर्सेस में एंट्रेस की प्रिपरेशन भी होता है। इस तरह के सेंटर आजकल छोटे-छोटे शहरों में भी खुल गए हैं। जिनकी हेड ऑफिस दिल्ली और मुम्बई में हैं और जिनकी शाखाएं पूरे देश मे फैली हुई हैं। इन सेंटर्स पर रेगुलर 2 से 6 घण्टे की क्लास चलती है। इन सेंटर्स की मांग आज काफी ज्यादा बढ़ती जा रही है यहां पढ़कर आज के स्टूडेंट्स अपने मनमाफिक कोर्स में एडमिशन पा रहें हैं।

क्या है इनकम के चांस

इन कोचिंग सेंटर्स में पढ़ाने वाले टीचर्स को काफी मोटी रकम मिलती है। अभी खबर आई थी कि बेंगलुरु में कोचिंग की वजह से स्कूलों में समस्या स्टार्ट हो गयी है क्योंकि टीचर्स स्कूलों में न पढ़ाकर कोचिंग्स में पढाना ज्यादा पसन्द कर रहें हैं। इसकी खास वजह सैलरी है। कोचिंग ट्यूशन के जरिये कम समय मे काफी पैसा कमाया जा सकता है। दूसरों की कोचिंग में पढ़ाकर और खुद की कोचिंग खोलकर पढाना भी विकल्प है। इन सारी बातों से आप अंदाजा लगा सकतें हैं कि आज ट्यूशन-कोचिंग टीचर का कैरियर कितना उभरता हुआ कैरियर है।


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Team Akanksha

Wednesday, 9 May 2018

सजेस्ट ए नेम फॉर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर

सेंट्रल गवर्नमेंट के महत्वाकांक्षी हेल्थ इंश्योरेंस प्रोग्राम- आयुष्मान भारत के तहत हेल्थ एन्ड वेलनेस सेंटर के नाम के सुझाव के लिए कॉम्पिटिशन का आयोजन किया गया है। इंट्रेस्टेड कैंडिडेट 15 मई 2018 तक अप्लाई कर सकतें हैं।

क्या है कॉम्पिटिशन

अम्बेडकर जयंती के अवसर पर प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी ने सेंट्रल गवर्नमेंट के महत्वाकांक्षी हेल्थ इंश्योरेंस प्रोग्राम-आयुष्मान भारत के तहत छतीसगढ़ के बाजीपुर जिले में हेल्थ एन्ड वेलनेस सेंटर का उद्घाटन किया था। प्राइम मिनिस्टर ऑफिस ने अब हेल्थ अब हेल्थ एन्ड वेलनेस सेंटर के नाम के सुझाव के लिए कॉम्पटीशन का आयोजन किया है।

नाम कैसा होना चाहिए

● हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का नाम अंग्रेजी या हिंदी भाषा में होना चाहिए।
● प्रोग्राम के थीम पर साधारण भाषा मे होना चाहिए।


इंट्री फीस: फ़्री

अप्लाई प्रोसेस
MyGov की वेबसाइट www.mygov.in लॉगइन करें। होमपेज पर क्रिएटिव कार्नर के लिंक पर क्लिक करें। अगले वेबपेज पर ऑल टास्क अंडर माईजीओवी शीर्षक के नीचे सजेस्ट ए नेम फॉर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर अंडर आयुष्मान भारत, लास्ट डेट मई 15, 2018 लिंक पर क्लिक करें। अब नए वेब पेज पर  'सजेस्ट ए नेम फॉर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर' के सी डिटेल्स लिंक पर क्लिक कर
कॉम्पटीशन को ध्यान से पढ़े और नि
र्देशानुसार आवेदन करें।
● कैंडिडेट केवल एक प्रविष्टि जमा कर सकतें हैं।
सजेस्ट ए नेम फॉर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर



अप्लाई करने की लास्ट डेट
14 मई 2018 (शाम 5.30 बजे तक)
ज्यादा जानकारी के लिए

वेबसाइट: www.mygov.in/task/suggest-name-health-and-wellness-centres


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Team Akanksha

उड़ान लोगों डिजाइनिंग कॉम्पटीशन


पार्टीसिपेट करें और जीतें  7000 का इनाम 

भारत सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने देश के नागरिकों से उड़ान लोगो डिजाइन कम्पटीशन में भाग लेने के लिए आवेदन मांगे हैं। मंत्रालय ने यह आवेदन उड़ान योजना के तहत मंगाया है। इस कम्पटीशन में 15 मई 2018 तक अप्लाई किया जा सकता है।

एलिजिबिलिटी: विशेष डिग्री या डिप्लोमा की जरूरत नहीं है।
आयु सीमा: मिनिस्ट्री ने इस कम्पटीशन के लिए मिनिमम और मैक्सिमम आयु की नही तय की है।

लोगो का प्रारूप

● लोगो जेपीईजी, पीएनजी या पीडीएफ फार्मेट में होना चाहिए।
● लोगो को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डिजाइन किया जाना चाहिए।
● यह सीएमवाईके रंग और आकार 5 सेंटीमीटर से 60 सेंटीमीटर के बीच पोर्ट्रेट या लैंडस्केप में होना चाहिए।
● इसका रिजोल्यूशन कम से कम 300 पिक्सल होना चाहिए।

इंट्री फीस: कुछ नही।

अप्लाई प्रोसेस

उड़ान लोगों डिजाइनिंग कॉम्पटीशन

● MyGov की वेबसाइट www.mygov.in लॉगइन करें। होमपेज पर क्रिएटिव कार्नर के लिंक पर क्लिक करें। अगले वेबपेज पर ऑल टास्क अंडर माईजीओवी शीर्षक के नीचे उड़ान लोगो डिजाइन कॉम्पटीशन, लास्ट डेट मई 15, 2018 लिंक पर क्लिक करें। कॉम्पटीशन को ध्यान से पढ़े और निर्देशानुसार आवेदन करें।
● कैंडिडेट केवल एक प्रविष्टि जमा कर सकतें हैं।

प्राइज: कॉम्पटीशन के लिए प्रति लोगो केवल एक विनर का चयन किया जाएगा। लोगो डिजाइन के विजेता को 7,000 रुपये का पुरस्कार मिलेगा।

ज्यादा जानकारी के लिए
वेबसाइट: www.mygov.in/task/udan-logo-design-competition
ईमेल: Usha.padhee@nic.in


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Team Akanksha

घूमें, घुमाएं और पैसे कमाएं

रोहन को महीने में अक्सर 10 दिन से ज्यादा अलग-अलग शहरों के लिए ट्रेवेल करना पड़ता हैं। क्योंकि उसका बिजनेस अलग शहरों में फैला हुआ है। निकिता भी अक्सर एक शहर से दूसरे शहर अपने कॉलेज के वीकेंड की छुट्टी होने पर जाती है। लेकिन ये दोनों और इनके बहुत सारे लोग बिल्कुल परेशान नही होते है क्योंकि इनके ट्रेवल का सारा जिम्मा इनका ट्रेवल प्लानर देखता है।

टिकट बुकिंग से लेकर ठहरने तक कि व्यवस्था और आपकी यात्रा को सुखद व यादगार बनाने का काम करतें हैं ट्रेवेल प्लानर और ये बढ़ता कारोबार है, क्योंकि इन दिनों काम और सैर-सपाटे के सिलसिले में लोगों का एक से दूसरे शहर आना-जाना भी काफी बढ़ा है। आइए जानते हैं कि क्या है ट्रैवेल प्लानर का काम और इसे कैसे शुरू कर सकतें हैं।

क्या है ट्रैवेल प्लानर का वर्क

आधुनिक भागमभाग वाले इस समय में हर दिन लोगों को कहीं न कहीं की यात्रा की करनी पड़ती है। कभी बिजनेस के सिलसिले में तो कभी किसी कॉन्फ्रेंस या मीटिंग में भाग लेने के लिए, कभी रिश्तेदारों से मिलने के लिए तो कभी छुट्टियों को मनाने के लिए। साल भर लोगों का आना-जाना लगा रहता है। प्लान अक्सर अचानक बनतें हैं, ऐसे में सबसे अधिक मुश्किल कन्फर्म टिकट मिलने में होती है। अगर नई जगह पर जा रहें हैं तो वहां रुकेंगे कहां, कैसी जगह होगी और किस तरीके से मैनेज करेंगे, यह चिंता लगी रहती है। इन सभी परेशानियों की राह को आसान करता है ट्रेवेल प्लानर।

मौके वाली इंडस्ट्री

मेट्रो सिटीज में तो कभी ट्रेवेल प्लानर काम करतें हैं।
लेकिन अभी मीडियम टाइप के शहरों में गिने-चुने ट्रेवेल प्लानर ही काम करतें हैं। ऐसे में स्वरोजगार के रूप में इसे शुरू करके कमाई के भरपूर मौके हैं।

कैसे कर सकतें है काम

अगर आप में तालमेल बिठाने की कला है तो आप एक ही शहर में  बैठे-बैठे बाकी शहरों के होटल, रिजॉर्ट या गेस्ट हाउस संचालक, टूरिस्ट गाइड आदि से बात कर अपने क्लाइंट को बेहतर सुविधा दे सकतें हैं। शुरुआती दिनों में थोड़ी-बहुत मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन काम करते-करते जाएंगे वैसे-वैसे परिचय और पहचान के बाद काम ई-मेल और कॉल पर हो जाएगा।
स्टार्टिंग के दिनों में चाहे तो टिकट बुकिंग से ही काम की शुरुआत की जा सकती है। अपने क्लाइंट को रेलवे टिकट, एयर टिकट और बस टिकट उपलब्ध करा कर आप उस टिकट पर अपना कमीशन ले सकतें हैं। इसके अलावा कुछ बड़े शहरों के रेलवे स्टेशन या बस अड्डे या टूरिस्ट प्लेस के आसपास के गेस्ट हाउस और होटल संचालको से बात कर लें और उनसे क्लाइंट के लिए कमरें और अन्य सुविधाएं अवेलेबल कराने की बात कर लें। क्लाइंट देने पर आप अपना कमीशन फिक्स कर लें या अपने टिकट, होटल, कैब आदि सभी सुविधाओं का एक पैकेज निर्धारित कर लें और अपने क्लाइंट से उस पैकेज का चार्ज लेने के बाद टिकट, होटल आदि सभी सुविधाओं का चार्ज देने के बाद अपना मुनाफा बचा लें।
काम शुरू करने के लिए सबसे पहले एक ऑफिस भले ही वह छोटा हो, जिसमे कम से कम तीन-चार लोगों के बैठने की जगह हो, खोल लें। ऑफिस में एक लैपटॉप या कम्प्यूटर हो जिसमें इंटरनेट कनेशक्शन जरूरी है। इंटरनेट कनेक्शन की वजह से ही आप आसानी से टिकट बुक कर सकेंगे  और बाकी शहरों के होटल, उनकी सर्विसेज आदि के बारे में  जान पाएंगे, साथ ही ई-मेल या फोन के जरिये उनसे कॉन्टैक्ट स्थापित कर सकते हैं। अगर आप अपनी वेबसाइट बनवा लें और उस पर अपनी सुविधाओं के बारे में अच्छे से विवरण दें और साथ ही अपना हेल्पलाइन नम्बर उपलब्ध करवा दें तो यह आपके बिजनेस को बढ़ाने में बहुत ही सहायक होगा।

मार्केटिंग

छोटे शहरों के लिए यह काम नया है और इसमें कम कम्पटीशन है, लेकिन फिर भी क्लाइंट बनाने के लिए प्रचार-प्रसार करना ही होगा। अपने शहर में प्रचार मटेरियल के जरिये प्रचार कर सकतें हैं। स्टार्टिंग के दिनों में परिचितों से खुद ही बात करके उनको अच्छी सुविधा देने का वादा करें तो बात और भी ज्यादा बन सकती हैं। इसके अलावा डिजिटल मार्केटिंग का सहारा लेकर आप बिजनेस फैला सकतें है ताकि दूसरे शहर से आने वाला इंसान भी आपके बारे में जान सके।

इनकम

इस बिजनेस में इनकम का  सारा स्रोत आपके क्लाइंट पर निर्भर करता है। जितने ज्यादा क्लाइंट होंगे उतना ज्यादा पैसा आपके पास आएगा। पर्व त्योहार और छुट्टियों के मौसम में आमदनी बढ़ सकती है। लेकिन अगर ढंग से कम किया जाए छोटे शहर में भी तो भी 15-20 हजार आसानी से कमाए जा सकते।

घूमें, घुमाएं और पैसे कमाएं

एजुकेशन

इस फील्ड में काम करने के लिए कोई विशेष एजुकेशन की जरूरत नही होती है। इस फील्ड में ऐसा कोई भी पर्सन आ सकता है जिसके अंदर लगन हो इस फील्ड में काम करने की।

कुछ जरूरी सॉफ्ट स्किल टिप्स

इस फील्ड कुछ सॉफ्ट स्किल्स का होना बहुत ही जरुरी होता है।
जो इस फील्ड में काम करने के लिए सही मायने में शिक्षा है।
● मिलनसार प्रवृति के साथ कम्युनिकेशन स्किल अच्छी होनी चाहिए। आपका व्यवहार और बातचीत लोगों को पसंद आनी वाली हो।
● लोगो की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहें। उनकी जरूरत और पॉकेट के अनुसार ट्रेवल प्लान करें।
● अपने आस पास के एन्विरोनेमेंट और वर्किंग इंडस्ट्री के बारे में हमेशा अपडेट होते रहें।
● प्रॉब्लम्स पर समय करने के बजाय सॉल्यूशन्स पर ध्यान लगाएं।

Thanks
Team Akanksha