Saturday, 26 May 2018

सिक्योरिटी देकर कैरियर को करें सिक्योर



आपने बॉडीगॉर्ड मूवी देखा होगा उसमे सलमान का काम आपने देखा होगा और उसके काम को देखकर एक्साइटमेन्ट हुआ होगा और संभावना के साथ-साथ चैलेंजेस भी दिखे होंगे। आइए जानते आज इस करियर के बारे में।

आज हमसे हर कोई अक्सर डकैती, लूट , किडनैपिंग और अन्य प्रकार के हिंसक वारदातों का शिकार हो जाता है। यही कारण है कि बड़ी कम्पनियां, बैंक, ज्वेलरी शोरूम और अन्य बड़े संस्थानों में पुलिस की चौकसी से ज्यादा निजी सिक्योरिटी एजेंसी के गॉर्ड पर भरोसा किया जाता है। असुरक्षा के खौफ और अपने जान-माल के साथ परिवारजनों की सलामती  के लिए बड़े -बड़े बिजनेसमैन ऐसी सिक्योरिटी एजेंसियों पर पैसा खर्च करना गलत नही मानते हैं। इन्हीं सब कारणों से पिछले दस सालों में सिक्योरिटी एजेंसियों की संख्या और इनके बिजनेस में जबरदस्त इजाफा हुआ है। एक अनुमान के मुताबिक आज सिक्योरिटी एजेंसियों का कारोबार 50 हजार करोड़ से ज्यादा का है।

ट्रेनिंग

हालाकिं सैन्य बलों अथवा अर्ध्द सैन्य बलों के बैकग्राउंड वाले लोगों को ही सिक्योरिटी एजेंसियों में काम करने के मौके मिलते हैं, पर आज बहुत सारे संस्थान हैं जो इस पेशे से जुड़ी जरुरी ट्रेनिंग देते हैं। ऐसे संस्थानों में फूल टाइम और शार्ट टर्म कोर्सेज कराए जाते हैं।


सिक्योरिटी देकर कैरियर को करें सिक्योर

एजेंसियों का स्पेशलाइजेशन

सिक्योरिटी एजेंसियों की बात की जाती है तो सहज ही सिक्योरिटी गार्ड की तस्वीर जेहन में उभर आती है। यही कारण है कि युवाओं की करियर प्राथमिकताओं में सिक्योरिटी प्रोफेशन का नाम तक नहीं आता। पर वास्तविकता में यह प्रोफेशन भी आवश्यकता के अनुसार के तरह के स्पेशलाइजेशन में बंट चुका है। इसमें युद्ध कौशल की हाई टेक टेक्नोलॉजी से लेकर आतंकवादी हमलों तक से टक्कर ले सकने में सक्षम जाबांजो तक कि जरूरत हो सकती है। इस क्रम में  सिक्योरिटी के महत्वपूर्ण फील्डों के आधार पर निम्न वर्गों के स्पेशलाइजेशन का उल्लेख किया जा सकता है।

वीवीआईपी की सिक्योरिटी: 
पॉलिटिशियन्स और गवर्नमेंट ऑफिसर्स को तो पुलिस और ब्लैक कमांडो सरीखी सुरक्षा आधिकारिक तौर पर मिल जाती है, पर फिल्मी हस्तियों, बड़े बिजनेसमैनों और अमीर परिवारों को निजी तौर पर ब्लैक कमांडो जैसी ट्रेनिंग प्राप्त सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स या बाउंसर्स की सेवाएं एजेंसी से लेनी पड़ती हैं। ये सिक्योरिटी ऑफिसर बॉडी गॉर्ड की भूमिका निभाने के अतिरिक्त, घर और ऑफिस की सिक्योरिटी व्यवस्था को चाक-चौबंद रखते हैं।

कैश वैन सिक्योरिटी सर्विस: 
देश भर के एटीएम में कैश पहुंचाने का जिम्मा अब ऐसी सिक्योरिटी एजेंसियों के हवाले किया जा चुका है, जो अपनी कैश वैन और सिक्योरिटी स्टाफ़ के साथ कैश की रकम विभिन्न एटीएम मशीनों व बैंकों की ब्रांचों तक सुरक्षित पहुंचाने का कॉन्ट्रैक्ट लेते हैं।

इंडस्ट्री और कॉरपोरेट सेक्टर की सुरक्षा:
इसमें सुरक्षा के कई लेवल शामिल होते हैं। ये गेट से लेकर ऑफिस के अन्दर तक फैले होते हैं और सबकी जिम्मेदारियां भी उसी क्रम में बंटी होती हैं। सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से कैंपस के चप्पे-चप्पे पर इनकी नजर होती है। वॉकी-टॉकी से लैस ये लोग जरा सा भी खतरा महसूस करने पर तुरंत एक्टिव हो जातें हैं।

एयर सिक्योरिटी मार्शल/ कमांडो: 
हवाई जहाज को हाईजैक होने से बचाने के उद्देश्य से बड़ी बड़ी एयरलाइन्स कम्पनियां हर विमान में यात्रियों के बीच ही अपने एयर मार्शल भी भेजतीं हैं।

क्यों बढ़ रहा है सिक्योरिटी एजेंसियों का कारोबार

देशभर में 20-30 हजार सिक्योरिटी एजेंसियां कार्यरत हैं और इनसे 50-70 लाख जुड़े हुए हैं। पर अधिकांश ऐसी एंजेसियों के असंगठित फील्ड में काम होने के कारण इनकी सही संख्या और इसमें रोजगार पाने वाले लोगों की सटीक संख्या का आकलन कर पाना मुश्किल होता है। प्रतिष्ठित और प्रोफेसनल्स द्वारा चलाई जा रही पुरानी एजेंसियों की सेवाएं अपेक्षाकृत महंगी होने के कारण इनके कस्टमर कारपोरेट घराने, सरकारी विभाग/संस्थान, बैंकिंग/फाइनेंस से जुड़ी कंपनियां, होटल आदि होतें हैं। जिनके गार्ड्स भी बाकायदा अच्छे डील-डौल वाले होते हैं। इनको गार्ड्स की ड्यूटी से जुड़ी ट्रेनिंग ट्रेंड प्रोफेसनल्स द्वारा दी जाती है, जिसमें ड्यूटी के वक्त चौकन्ना रहने के साथ-साथ अपराधियों को काबू करने से सम्बंधित कला का व्यवहारिक ज्ञान भी शामिल है। इनसे ऊपर सिक्योरिटी सुपरवाइजर होतें हैं, जो गार्ड्स और उनके कामकाज पर तीखी नजर रखते हैं। इन सबके ऊपर सिक्योरिटी मैनेजर्स होतें हैं।

इसकी वजह:

●  बढ़ते आतंकी हमले
●  पुलिस फोर्स की कमी
●  बढ़ता शहरीकरण
●  शॉपिंग मॉल की तेजी से बढ़ती संख्या
●  क्राइम के केसेज लगातार बढ़ते जाना
●  प्राइवेट टाउनशिप का बड़े पैमाने पर बिल्डर्स द्वारा डेवेलपमेंट

    सिक्योरिटी प्रोफेशनल बनने के लिए जरूरी स्किल्स

●  एजुकेटेड होना ही काफी नहीं हैं, बल्कि प्रोमोशन के लिए भी उच्च शिक्षा जरूरी मानी जाती हैं।
●  आकर्षक और गठीला शरीर तथा ऊंची कद-काठी वाली पर्सनालिटी
●  मैनेजमेंट के बैकग्राउंड के लोगों के लिए सिक्योरिटी प्लानिंग का काम करना आसान होता है।
●  एनसीसी अथवा इसी तरह की ट्रेनिंग प्राप्त युवाओं को वरीयता दी जाती है।

सेल्फ एम्प्लॉयमेंट के भी मौके

इस प्रोफेसन में काम का एक्सपीरियंस हासिल करने के बाद काफी कम पूंजी निवेश के साथ अपनी सिक्योरिटी एजेंसी भी खोली जा सकती है। शुरुआत में पर्सनल जान-पहचान से कॉन्ट्रैक्ट मिल सकता है उसके बाद धीरे-धीरे नाम होने पर कई सारे कॉन्ट्रैक्ट्स मिल सकतें हैं। यह सिक्योरिटी का मामला है तो किसी भी तरह की लापरवाही से सबकुछ बर्बाद कर सकता है।

Thanks
Team Akanksha

Sunday, 13 May 2018

प्रोडक्ट डिजाइनर: प्रोडक्शन फील्ड में उभरता हुआ नया कैरियर


आपने कई बार जब बाजार में जातें है तो कई सारे प्रोडक्ट्स जैसे बच्चों के खिलौने से लेकर बड़ी बड़ी कारों की डिजाइन को देखकर आप चकित हो जातें हैं। आप जिधर भी नजर दौडाएंगे आपको एक से एक डिजाइनर और स्टाइलिश प्रोडक्ट मिल जायेंगे। ये सब चकित कर देने  वाले प्रोडक्ट्स प्रोडक्ट डिजाइनर बनातें हैं। जो अपनी इमैजिनेशन पॉवर और ब्यूटिसेन्स की बदौलत इन सारे प्रोडक्ट्स को बनातें हैं। इसलिए इंजीनियरिंग के इस ब्रांच का दबदबा बढ़ता जा रहा है और स्टूडेंट्स का भी रुझान इस ओर बढ़ रहा है।

वर्क प्रोफाइल

प्रोडक्ट डिजाइनर कमर्शियल प्रोडक्शन फर्मों के लिए प्रोडक्ट्स और मटेरियल डिजाइन करते हैं। किसी भी प्रॉडक्ट को डिजाइन करने से पहले ये उसकी विजुअल अपील और व्यवहारिक उपयोग का पूरा ध्यान रखतें हैं। एक प्रोडक्ट डिजाइनर को कार, डोमेस्टिक उपकरण, कंप्यूटर, मेडिकल उपकरण, ऑफिस या इंटरटेनमेंट के उपकरण, खिलौने आदि भी डिजाइन करना पड़ता है। उन्हें रिसर्च टीम, एडवरटाइजिंग टीम और प्रोडक्शन मैनेजर से बातचीत करने के अलावा ग्राफिक डिजाइनर के साथ भी करना होता है।

प्रोडक्ट डिजाइनर: प्रोडक्शन फील्ड में उभरता हुआ नया कैरियर

'स्किल इस इम्पॉर्टेन्ट'

प्रोडक्ट डिजाइनर को आर्टिस्टिक होने के साथ-साथ तार्किक रूप से सोचने वाला भी होना चाहिए। अगर आपके पास कुछ अलग और यूनिक आइडियाज होंगे, तभी अपनी अलग पहचान बना सकेंगे। इसी तरह आपकी ऑब्जरवेशन स्किल और विज़ुअल इमेजिनेशन भी बेहतरीन होनी चाहिए।आपको ड्राइंग के मीडियम से अपने आइडिया को व्यक्त करने और कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के प्रोडक्शन और मार्केटिंग की समझ भी होनी चाहिए।

एलिजिबिलिटी एन्ड कोर्स

अगर आपके पास आर्किटेक्चर या इंजीनियरिंग में डिग्री होगी तो आप आईआईटी से इंडस्ट्रियल डिजाइनिंग में मास्टर डिग्री हासिल कर सकते हैं। इससे कैरियर के विकास बेहतर रहेगा। वैसे साइंस स्ट्रीम से 12वीं करने वाले नेशनल इंस्टीट्यूट डिजाइन का कोर्स कर प्रोडक्ट डिजाइनिंग के क्षेत्र में आ सकते हैं। हां, इसके लिए जेईई की परीक्षा पास करनी होगी। प्रोडक्ट डिजाइनर सेरामिक और फर्नीचर डिजाइन में स्पेशलाइजेशन भी कर सकते हैं। वैसे कई प्राइवेट इंस्टिट्यूट प्रोडक्ट डिजाइन से सम्बंधित कोर्स संचालित कर रहे हैं।

मौके और डिमांड

प्रोडक्शन फर्मों के डिजाइन डिपार्टमेंट में प्रोडक्ट डिजाइनरों  की अच्छी मांग होती है। आप इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट डिजाइनर, वॉच डिजाइनर, फुटवियर डिजाइनर, डिजिटल डिजाइनर आदि के रूप में कैरियर शुरू कर सकतें हैं। इसके अलावा चाहें तो कन्सल्टिंग फर्मों में भी काम कर सकतें हैं। जो लोग सेरामिक्स में स्पेशलाइजेशन रखतें हैं, उनके लिए टेबल वेयर, सैनिटरी वेयर, पॉटरी, डेकोरेटिव पोर्सलीन जैसे इंडस्ट्री में ढेरों मौके अवेलेबल हैं। बड़ी-बड़ी कार कम्पनियां समय-समय पर प्रोडक्ट डिजानरों की भर्ती करती रहतीं हैं। इस समय जब मेक इन इंडिया पर सरकार का इतना जोर है तो भारतीय प्रोडक्ट डिजाइनरों का इम्पॉर्टेन्ट और भी बढ़ जाता है।
अगर आप एंटरप्रेन्योरशिप में भी जातें है तो भी लम्बे समय के लिए फायदेमंद हो सकता है।

चैलेंजेस

एक डिजाइनर हमेशा इस तरह डिजाइन करता है जैसे वह खुद के लिए नही बल्कि अपने काम को अपने क्लाइंट के लिए करता है। साथ ही इस क्षेत्र में सक्सेस हासिल करने के लिए जरूरी है कि आप कुछ खास, नया और आकर्षक पेश करें।

इनकम

आज इस इंडस्ट्री में एनुअली 6-8 लाख रुपये के बीच हो सकता है। कुछ सालों के एक्सपेरिएंस के साथ-साथ आपके इनकम में बढ़ जाएगी। वैसे फॉरेन में इण्डियन डिजाइनर की काफ़ी डिमांड है।

टॉप इंस्टिट्यूट्स

इंडस्ट्रियल डिजाइन सेंटर, आईआईटीबी, मुम्बई
वेबसाइट: www.idc.iitb.ac.in

मैनेजमेंट इंस्टीटूट ऑफ डिजाइन, पालदी, अहमदाबाद
वेबसाइट: www.mada.ac.in

सिंबायोसिस इंस्टिट्यूट ऑफ डिजाइन, पुणे
वेबसाइट: www.sid.edu.in

● एमआईटी इंस्टीटूट ऑफ डिजाइन, पुणे
वेबसाइट: www.mitpune.com

डिपार्टमेंट ऑफ डिजाइन, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी(आईआईटी), गुवाहटी
वेबसाइट: www.iitg.ac.in

Thanks
Team Akanksha

जॉब कंसल्टेंसी: नए समय का नया बिजनेस


सुकन्या और नीरज दिन भर इंटरव्यू लेते रहतें है लेकिन उनमें से एक भी कैंडिडेट उनकी कम्पनी में काम नही करता है। बल्कि सारे कैंडिडेट किसी और कम्पनी में जाते हैं। दोनों इस काम से काफी पैसा भी कमाते हैं।वो दोनों इस काम को काफी इंजॉय भी करतें है क्योंकि इसमें वो कम्पनी और कैंडिडेट दोनो की हेल्प करतें हैं।


जॉब कन्सलटेंसी को स्टफिंग या टेम्परेरी एजेंसी भी कहा जाता है। इसमें किस-किस जगह नौकरी है पता करके उसके कम्पनी के लिए परफेक्ट कैंडिडेट की तलाश की जाती है, उनका इंटरव्यू भी लिया और स्क्रूटनी भी किया जाता है। जॉब कन्सलटेंसी का सीधा सा काम होता है मार्केट की कम्पनियों और संस्थानों में खाली पोस्ट पर 
परफेक्ट कैंडिडेट भेजना।

कैसे कर सकतें हैं शुरुआत

इस इंडस्ट्री का फील्ड भी काफी बड़ा है। जैसे टेक्निकल से लेकर नॉन टेक्निकल और परमानेंट से लेकर टेम्पररी तक। इसलिए जब भी स्टार्ट करें तो किसी एक स्पेशल फील्ड पहले फोकस करके उस पर कमांड करें। साथ ही रजिस्ट्रेशन और लीगल पेपर्स, लाइसेंस आदि भी करा लें।
इसके बाद आप अपने पसंदीदा फील्ड के बारीकियों के बारे में समझ लें। जैसे उस फील्ड में क्या-क्या डिमांड है, कौन-कौन सी एजेंसियां अभी सर्विस दे रही हैं, क्या अप-डाउन्स हैं। सारी चीजें अच्छे से समझ लें फिर कदम बढ़ाएं। क्योंकि एक बेहतर रिसर्च वर्क एक बेहतर कम्पनी की नींव होता है।

एजेंसी स्टार्ट करने में लागत

पहर बिजनेस की तरह यह बिजनेस भी एक स्टार्टिंग इन्वेस्टमेंट चाहता है। जैसे जगह पर खर्च, इम्प्लॉइज पर खर्च, इन्श्योरेंस, ऑफिस सेट अप जैसे एक्सपेंस का एक पूरा कैलकुलेशन कर लें।इसके लिए आप लोन भी ले सकतें हैं और लोन के लिए जरूरी है कि आप अपना पेपर वर्क मजबूत रखें। क्योंकि शुरुआत में 2-3 लाख रुपये तक लग सकते हैं। क्योंकि ऑफिस में कम्प्यूटर, फर्नीचर, शुरुआती कुछ खर्च के लिए बजट और सारे बेसिक काम होते हैं।

सही प्लेस और सही स्टाफ का करें सिलेक्शन

कहतें है सही जगह का चुनाव कर लेना बिजनेस के लिए सफलता की पहली सीढ़ी होती है। इसके लिए जगह ऐसी होनी चाहिए, जो लोगों के नजर में आ सकें और आसानी से नौकरी देने वाली कम्पनी और कैंडिडेट्स वहां पहुंच सके। एक बिजनेस करने जा रहे तो जाहिर सी बात है आपको कुछ लोगों की जरूरत बिल्कुल पड़ेगी। इसके लिए नेटवर्किंग, एडवरटाइजिंग के जरिये, चाहे जैसे करें स्टाफ का सेलेक्शन बहुत ध्यान से करें और उनका पूरा डीटेल भी अपने पास रखें।इस बात की पूरी तसल्ली कर लें कि वह आपके वर्क स्टाइल को सूट करतें हैं या नही। एक एक्सपीरिएंसड स्टाफ एक्सपेक्टेड कस्टमर से कॉन्टैक्ट करने, इंटरव्यू करने और जॉब के लिए कैंडिडेट्स का आकलन करने का कार्य बखूबी करता है।

मार्केटिंग प्लान हो जबरदस्त

मार्केटिंग का प्लान करने से पहले टारगेटेड क्लाइंट्स का एक लिस्ट बना लें। इसमें अपने पर्सनल कॉन्टैक्ट,  उन कम्पनियों की लिस्ट, जिनके लिए आप शुरुआत में काम करेंगे। इसके लिए इंटरनेट, सोशल मीडिया पर लिंक्डइन का का भरपूर मदद ले सकते हैं। इसके बाद शुरुआती ई-मेल कम्पनियों को भेजकर अपने सर्विसेज के बारें में बता दें जिससे वो कम्पनी में होने वाली जॉब नोटिफिकेशन आपके साथ भी शेयर कर दिया करें। आप अपना एडवरटीजमेन्ट न्यूजपेपर, मैगजीन में देकर, सोशल साइट्स पर नोटिफिकेशन डालकर, सोशल मीडिया पर एड चलकर कर सकतें हैं।

योग्यता और स्किल

इस इंडस्ट्री में किसी विशेष डिग्री की जरूरत नही होती है। लेकिन आपके कुछ बातों का होना बहुत जरूरी हैं।

● इंडस्ट्री की समझ: जिस फील्ड में आप प्लेसमेंट आप कराना चाहते। है उसकी आपको अच्छी समझ होनी चाहिए।

● कम्युनिकेशन स्किल: आपकी कम्युनिकेशन बहुत परफेक्ट होनी चाहिए।

जॉब कंसल्टेंसी: नए समय का नया बिजनेस
● लोक-व्यवहार(मैनर्स एन्ड एटिकेट्स): आप किसी का इंटरव्यू लेकर किसी कम्पनी में आप उस कैंडिडेट को जॉब के लिए रिकमेंड करतें हैं। इसलिए आपको लोगों के व्यवहार में बहुत अच्छे ढंग से पता होना चाहिए।

● कूलनेस: कई बार दिनभर काम करने के बाद रिजल्ट उस तरह नही आएगा, कम्पनी का प्रेशर होगा, कैंडिडेट का एटीट्यूड, कम्पटीशन का दबाव आपको परेशान कर सकता है इसलिए आपको कूल बनाकर रखना होगा।

इनकम

यह इंडस्ट्री पूरी तरह से आपके कैंडिडेट के कम्पनी में जॉब लग जाने के पर निर्भर करती है। बेसिकली कन्सलटेंसी अपने कैंडिडेट से चार्ज करती हैं। 
शुरुआत में  लगन से कम करके एक अच्छी आमदनी कमा सकतें हैं उसके बाद अनुभव होने और कॉन्टेक्ट्स बनने के बाद बहुत सारा पैसा कमा सकतें हैं।

Thanks
Team Akanksha

Friday, 11 May 2018

ट्यूशन-कोचिंग आज का उभरता हुआ कैरियर



ट्यूशन की सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें कोई पूंजी नही लगानी पड़ती और न ही बहुत ज्यादा समय देने की आवश्यकता पड़ती है। कोई भी ट्यूटर अपने हिसाब से समय तय कर सकता है और अपनी शैक्षणिक योग्यता के अनुसार छात्र-छात्राओं का चयन कर सकता है....


एक समय था जब ट्यूशन वही लोग लेते थे जो कड़की-सड़की में रहते थे, या पार्ट टाइम पढ़ाकर पैसे कमा लेना चाहते थे। मगर अब जमाना पूरा बदल गया है. ट्यूशन और कोचिंग इस दौर में बाकायदा का प्रोफेशन बन गए हैं। ये ऐसे काम हो गए हैं जिसमे पैसा तो है सम्मान भी बहुत ज्यादा है आज हर किसी को अपने बच्चों के लिए , हर किसी महत्वाकांक्षी इंसान को बेस्ट ट्यूटर या कोच चाहिए। इसी कारण ट्यूटर या कोच का सोसाइटी में वैल्यू बढ़ने लगा है।


ट्यूशन-कोचिंग आज का उभरता हुआ कैरियर
दिनोदिन बढ़ता ग्राफ

यहां यह समझ लेना जरूरी है कि ट्यूशन का दायरा छोटा होता है, जबकि कोचिंग क्लास का दायरा बहुत बड़ा है। ट्यूशन की सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें कोई कैपिटल नही लगानी पड़ती और ज्यादा समय देने की भी जरूरत भी नही पड़ती है। कोई भी ट्यूटर ट्यूशन के लिए अपने हिसाब से समय तय कर सकता है। कुछ साल पहले अमेरिका की प्रतिष्ठित मैगजीन 'टाइम' ने एक बड़ा आर्टिकल पब्लिश किया था, जिसमे बताया था कि किस तरह एशियाई बच्चों के पैरेंट्स अपनी संतानों की ट्यूशन को तवज्जोह दे रहे हैं। ट्यूशन के दो तरीके हैं। एक तो यह आपको घर जाकर बच्चों को पढ़ाना पड़ता है और दूसरा यह कि अपने घर पर ही बुलाकर बच्चों को पढ़ाना रहता है। ट्यूशन में आप अपने एजुकेशनल एलिजिबिलिटी के हिसाब से स्टूडेंट्स को चुन सकते हैं। अगर आप ग्रेजुएट हैं तो आप 10 वीं तक पढ़ा सकते हैं और अगर पोस्टग्रेजुएट हैं तो 12वीं के अलावा ग्रेजुएट लेवल के स्टूडेंट्स को पढ़ा सकतें है। आजकल ट्यूशन की आउटसोर्सिंग भी होने लगी है मतलब आप घर से बैठे-बैठे ही बाहर के किसी भी स्टूडेंट को पढ़ा सकतें हैं। इससे आपको अच्छा-खासा पैसा मिल सकता है।
ट्यूशन एक ऐसा फील्ड है जिसमें पैसा आपकी मेहनत और आपके समय पर निर्भर करता है। जितने घंटे समय आप मेहनत करेंगे उतनी ही आपकी इनकम हो सकती है। मुंबई एवं दिल्ली जैसे शहरों में तो घंटे के हिसाब से ट्यूटर को पैसे मिलते हैं। इन शहरों में 12वीं क्लास के स्टूडेंट को 1 घण्टा साइंस, मैथमेटिक्स और इंग्लिश पढ़ाने के लिए 4 से 5 हजार रुपये महीने तक मिलते हैं। अगर अपने घर बुलाकर भी पढाते हैं तो भी हजारों रुपए कमा सकतें हैं। छोटे शहरों में भी अगर ट्यूशन दिया जाए तो भी 20,000  तक कमाया जा सकता है।

एक्सपीरियंस देता है बहुत सारा मौका

ट्यूशन एक ऐसा फील्ड जिसमें एक्सपीरियंस बहुत मैटर करता है। शुरुआत में पढ़ाने के लिए आपको पढ़ना पड़ता है लेकिन जैसे-जैसे अनुभव हो जाएगा वैसे-वैसे इसकी जरूरत कम हो जाएगी। अगर सिलेबस बदल रहा है तो उसके हिसाब से आपको भी बदलना रहता है। पढ़ाने से आपके अंदर काफी निखार आ जाता है जिससे किसी भी कम्पटेटिव एग्जाम में बैठने पर आपको काफी फायदा मिलता है। मेहनत और लगन से काम करते रहने के बाद एक सफल ट्यूटर बन सकते। हैं।

कैसे होता है काम

कोचिंग क्लास का कांसेप्ट ट्यूशन से एकदम अलग होता है। ट्यूशन में जहां एक एक पर्सन ही ट्यूशन देता है और प्रायः घर-घर जाकर ट्यूशन लेता है। वहीं किसी भी कोचिंग क्लास का प्रायः विशाल कैंपस होता है। इसमें कैपिटल लगाने की भी जरूरत पड़ती है। ऐसे में सेंटर्स पर अलग-अलग सब्जेक्ट के टीचर्स अपॉइंट किये जाते हैं। इन सेंटरों पर 10वीं और 12वीं के साथ-साथ इंजीनियरिंग, डॉक्टरी, सीए और मैनेजमेंट जैसे बड़े कोर्सेस में एंट्रेस की प्रिपरेशन भी होता है। इस तरह के सेंटर आजकल छोटे-छोटे शहरों में भी खुल गए हैं। जिनकी हेड ऑफिस दिल्ली और मुम्बई में हैं और जिनकी शाखाएं पूरे देश मे फैली हुई हैं। इन सेंटर्स पर रेगुलर 2 से 6 घण्टे की क्लास चलती है। इन सेंटर्स की मांग आज काफी ज्यादा बढ़ती जा रही है यहां पढ़कर आज के स्टूडेंट्स अपने मनमाफिक कोर्स में एडमिशन पा रहें हैं।

क्या है इनकम के चांस

इन कोचिंग सेंटर्स में पढ़ाने वाले टीचर्स को काफी मोटी रकम मिलती है। अभी खबर आई थी कि बेंगलुरु में कोचिंग की वजह से स्कूलों में समस्या स्टार्ट हो गयी है क्योंकि टीचर्स स्कूलों में न पढ़ाकर कोचिंग्स में पढाना ज्यादा पसन्द कर रहें हैं। इसकी खास वजह सैलरी है। कोचिंग ट्यूशन के जरिये कम समय मे काफी पैसा कमाया जा सकता है। दूसरों की कोचिंग में पढ़ाकर और खुद की कोचिंग खोलकर पढाना भी विकल्प है। इन सारी बातों से आप अंदाजा लगा सकतें हैं कि आज ट्यूशन-कोचिंग टीचर का कैरियर कितना उभरता हुआ कैरियर है।


Thanks
Team Akanksha

Wednesday, 9 May 2018

सजेस्ट ए नेम फॉर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर

सेंट्रल गवर्नमेंट के महत्वाकांक्षी हेल्थ इंश्योरेंस प्रोग्राम- आयुष्मान भारत के तहत हेल्थ एन्ड वेलनेस सेंटर के नाम के सुझाव के लिए कॉम्पिटिशन का आयोजन किया गया है। इंट्रेस्टेड कैंडिडेट 15 मई 2018 तक अप्लाई कर सकतें हैं।

क्या है कॉम्पिटिशन

अम्बेडकर जयंती के अवसर पर प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी ने सेंट्रल गवर्नमेंट के महत्वाकांक्षी हेल्थ इंश्योरेंस प्रोग्राम-आयुष्मान भारत के तहत छतीसगढ़ के बाजीपुर जिले में हेल्थ एन्ड वेलनेस सेंटर का उद्घाटन किया था। प्राइम मिनिस्टर ऑफिस ने अब हेल्थ अब हेल्थ एन्ड वेलनेस सेंटर के नाम के सुझाव के लिए कॉम्पटीशन का आयोजन किया है।

नाम कैसा होना चाहिए

● हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का नाम अंग्रेजी या हिंदी भाषा में होना चाहिए।
● प्रोग्राम के थीम पर साधारण भाषा मे होना चाहिए।


इंट्री फीस: फ़्री

अप्लाई प्रोसेस
MyGov की वेबसाइट www.mygov.in लॉगइन करें। होमपेज पर क्रिएटिव कार्नर के लिंक पर क्लिक करें। अगले वेबपेज पर ऑल टास्क अंडर माईजीओवी शीर्षक के नीचे सजेस्ट ए नेम फॉर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर अंडर आयुष्मान भारत, लास्ट डेट मई 15, 2018 लिंक पर क्लिक करें। अब नए वेब पेज पर  'सजेस्ट ए नेम फॉर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर' के सी डिटेल्स लिंक पर क्लिक कर
कॉम्पटीशन को ध्यान से पढ़े और नि
र्देशानुसार आवेदन करें।
● कैंडिडेट केवल एक प्रविष्टि जमा कर सकतें हैं।
सजेस्ट ए नेम फॉर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर



अप्लाई करने की लास्ट डेट
14 मई 2018 (शाम 5.30 बजे तक)
ज्यादा जानकारी के लिए

वेबसाइट: www.mygov.in/task/suggest-name-health-and-wellness-centres


Thanks
Team Akanksha

उड़ान लोगों डिजाइनिंग कॉम्पटीशन


पार्टीसिपेट करें और जीतें  7000 का इनाम 

भारत सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने देश के नागरिकों से उड़ान लोगो डिजाइन कम्पटीशन में भाग लेने के लिए आवेदन मांगे हैं। मंत्रालय ने यह आवेदन उड़ान योजना के तहत मंगाया है। इस कम्पटीशन में 15 मई 2018 तक अप्लाई किया जा सकता है।

एलिजिबिलिटी: विशेष डिग्री या डिप्लोमा की जरूरत नहीं है।
आयु सीमा: मिनिस्ट्री ने इस कम्पटीशन के लिए मिनिमम और मैक्सिमम आयु की नही तय की है।

लोगो का प्रारूप

● लोगो जेपीईजी, पीएनजी या पीडीएफ फार्मेट में होना चाहिए।
● लोगो को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डिजाइन किया जाना चाहिए।
● यह सीएमवाईके रंग और आकार 5 सेंटीमीटर से 60 सेंटीमीटर के बीच पोर्ट्रेट या लैंडस्केप में होना चाहिए।
● इसका रिजोल्यूशन कम से कम 300 पिक्सल होना चाहिए।

इंट्री फीस: कुछ नही।

अप्लाई प्रोसेस

उड़ान लोगों डिजाइनिंग कॉम्पटीशन

● MyGov की वेबसाइट www.mygov.in लॉगइन करें। होमपेज पर क्रिएटिव कार्नर के लिंक पर क्लिक करें। अगले वेबपेज पर ऑल टास्क अंडर माईजीओवी शीर्षक के नीचे उड़ान लोगो डिजाइन कॉम्पटीशन, लास्ट डेट मई 15, 2018 लिंक पर क्लिक करें। कॉम्पटीशन को ध्यान से पढ़े और निर्देशानुसार आवेदन करें।
● कैंडिडेट केवल एक प्रविष्टि जमा कर सकतें हैं।

प्राइज: कॉम्पटीशन के लिए प्रति लोगो केवल एक विनर का चयन किया जाएगा। लोगो डिजाइन के विजेता को 7,000 रुपये का पुरस्कार मिलेगा।

ज्यादा जानकारी के लिए
वेबसाइट: www.mygov.in/task/udan-logo-design-competition
ईमेल: Usha.padhee@nic.in


Thanks
Team Akanksha

घूमें, घुमाएं और पैसे कमाएं

रोहन को महीने में अक्सर 10 दिन से ज्यादा अलग-अलग शहरों के लिए ट्रेवेल करना पड़ता हैं। क्योंकि उसका बिजनेस अलग शहरों में फैला हुआ है। निकिता भी अक्सर एक शहर से दूसरे शहर अपने कॉलेज के वीकेंड की छुट्टी होने पर जाती है। लेकिन ये दोनों और इनके बहुत सारे लोग बिल्कुल परेशान नही होते है क्योंकि इनके ट्रेवल का सारा जिम्मा इनका ट्रेवल प्लानर देखता है।

टिकट बुकिंग से लेकर ठहरने तक कि व्यवस्था और आपकी यात्रा को सुखद व यादगार बनाने का काम करतें हैं ट्रेवेल प्लानर और ये बढ़ता कारोबार है, क्योंकि इन दिनों काम और सैर-सपाटे के सिलसिले में लोगों का एक से दूसरे शहर आना-जाना भी काफी बढ़ा है। आइए जानते हैं कि क्या है ट्रैवेल प्लानर का काम और इसे कैसे शुरू कर सकतें हैं।

क्या है ट्रैवेल प्लानर का वर्क

आधुनिक भागमभाग वाले इस समय में हर दिन लोगों को कहीं न कहीं की यात्रा की करनी पड़ती है। कभी बिजनेस के सिलसिले में तो कभी किसी कॉन्फ्रेंस या मीटिंग में भाग लेने के लिए, कभी रिश्तेदारों से मिलने के लिए तो कभी छुट्टियों को मनाने के लिए। साल भर लोगों का आना-जाना लगा रहता है। प्लान अक्सर अचानक बनतें हैं, ऐसे में सबसे अधिक मुश्किल कन्फर्म टिकट मिलने में होती है। अगर नई जगह पर जा रहें हैं तो वहां रुकेंगे कहां, कैसी जगह होगी और किस तरीके से मैनेज करेंगे, यह चिंता लगी रहती है। इन सभी परेशानियों की राह को आसान करता है ट्रेवेल प्लानर।

मौके वाली इंडस्ट्री

मेट्रो सिटीज में तो कभी ट्रेवेल प्लानर काम करतें हैं।
लेकिन अभी मीडियम टाइप के शहरों में गिने-चुने ट्रेवेल प्लानर ही काम करतें हैं। ऐसे में स्वरोजगार के रूप में इसे शुरू करके कमाई के भरपूर मौके हैं।

कैसे कर सकतें है काम

अगर आप में तालमेल बिठाने की कला है तो आप एक ही शहर में  बैठे-बैठे बाकी शहरों के होटल, रिजॉर्ट या गेस्ट हाउस संचालक, टूरिस्ट गाइड आदि से बात कर अपने क्लाइंट को बेहतर सुविधा दे सकतें हैं। शुरुआती दिनों में थोड़ी-बहुत मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन काम करते-करते जाएंगे वैसे-वैसे परिचय और पहचान के बाद काम ई-मेल और कॉल पर हो जाएगा।
स्टार्टिंग के दिनों में चाहे तो टिकट बुकिंग से ही काम की शुरुआत की जा सकती है। अपने क्लाइंट को रेलवे टिकट, एयर टिकट और बस टिकट उपलब्ध करा कर आप उस टिकट पर अपना कमीशन ले सकतें हैं। इसके अलावा कुछ बड़े शहरों के रेलवे स्टेशन या बस अड्डे या टूरिस्ट प्लेस के आसपास के गेस्ट हाउस और होटल संचालको से बात कर लें और उनसे क्लाइंट के लिए कमरें और अन्य सुविधाएं अवेलेबल कराने की बात कर लें। क्लाइंट देने पर आप अपना कमीशन फिक्स कर लें या अपने टिकट, होटल, कैब आदि सभी सुविधाओं का एक पैकेज निर्धारित कर लें और अपने क्लाइंट से उस पैकेज का चार्ज लेने के बाद टिकट, होटल आदि सभी सुविधाओं का चार्ज देने के बाद अपना मुनाफा बचा लें।
काम शुरू करने के लिए सबसे पहले एक ऑफिस भले ही वह छोटा हो, जिसमे कम से कम तीन-चार लोगों के बैठने की जगह हो, खोल लें। ऑफिस में एक लैपटॉप या कम्प्यूटर हो जिसमें इंटरनेट कनेशक्शन जरूरी है। इंटरनेट कनेक्शन की वजह से ही आप आसानी से टिकट बुक कर सकेंगे  और बाकी शहरों के होटल, उनकी सर्विसेज आदि के बारे में  जान पाएंगे, साथ ही ई-मेल या फोन के जरिये उनसे कॉन्टैक्ट स्थापित कर सकते हैं। अगर आप अपनी वेबसाइट बनवा लें और उस पर अपनी सुविधाओं के बारे में अच्छे से विवरण दें और साथ ही अपना हेल्पलाइन नम्बर उपलब्ध करवा दें तो यह आपके बिजनेस को बढ़ाने में बहुत ही सहायक होगा।

मार्केटिंग

छोटे शहरों के लिए यह काम नया है और इसमें कम कम्पटीशन है, लेकिन फिर भी क्लाइंट बनाने के लिए प्रचार-प्रसार करना ही होगा। अपने शहर में प्रचार मटेरियल के जरिये प्रचार कर सकतें हैं। स्टार्टिंग के दिनों में परिचितों से खुद ही बात करके उनको अच्छी सुविधा देने का वादा करें तो बात और भी ज्यादा बन सकती हैं। इसके अलावा डिजिटल मार्केटिंग का सहारा लेकर आप बिजनेस फैला सकतें है ताकि दूसरे शहर से आने वाला इंसान भी आपके बारे में जान सके।

इनकम

इस बिजनेस में इनकम का  सारा स्रोत आपके क्लाइंट पर निर्भर करता है। जितने ज्यादा क्लाइंट होंगे उतना ज्यादा पैसा आपके पास आएगा। पर्व त्योहार और छुट्टियों के मौसम में आमदनी बढ़ सकती है। लेकिन अगर ढंग से कम किया जाए छोटे शहर में भी तो भी 15-20 हजार आसानी से कमाए जा सकते।

घूमें, घुमाएं और पैसे कमाएं

एजुकेशन

इस फील्ड में काम करने के लिए कोई विशेष एजुकेशन की जरूरत नही होती है। इस फील्ड में ऐसा कोई भी पर्सन आ सकता है जिसके अंदर लगन हो इस फील्ड में काम करने की।

कुछ जरूरी सॉफ्ट स्किल टिप्स

इस फील्ड कुछ सॉफ्ट स्किल्स का होना बहुत ही जरुरी होता है।
जो इस फील्ड में काम करने के लिए सही मायने में शिक्षा है।
● मिलनसार प्रवृति के साथ कम्युनिकेशन स्किल अच्छी होनी चाहिए। आपका व्यवहार और बातचीत लोगों को पसंद आनी वाली हो।
● लोगो की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहें। उनकी जरूरत और पॉकेट के अनुसार ट्रेवल प्लान करें।
● अपने आस पास के एन्विरोनेमेंट और वर्किंग इंडस्ट्री के बारे में हमेशा अपडेट होते रहें।
● प्रॉब्लम्स पर समय करने के बजाय सॉल्यूशन्स पर ध्यान लगाएं।

Thanks
Team Akanksha

Friday, 27 April 2018

फ़ूड प्लानिंग में भी रोजगार है की ऑपर्चुनिटी


अच्छी सेहत और स्वास्थ्य आहार के तालमेल के मद्देनजर वर्तमान माहौल में न्यूट्रिशनिस्ट/डायटीशियन की काफी मांग है

आजकल लोगों में स्वास्थ्य जागरूकता देखते बनती है। एक्सरसाइज से लेकर फ़ूड तक उनके उनके द्वारा उस उपाय को अपनाया जाता है जो उनको फिट रखने में मददगार हो। यही कारण है कि अच्छी सेहत को ध्यान में रखते हुए आहार के मामले में  न्यूट्रिशनिस्ट/डायटीशियन की सलाह लेंने में भी वे पीछे नहीं हैं। ऐसे में न्यूट्रिशनिस्ट/डायटीशियन की मांग पहले की तुलना में अब काफी बढ़ गयी है

 फ़ूड प्लानिंग में रोजगार ऑपर्चुनिटी 

वर्क रूटीन

मोटे तौर पर कहा जाए तो डाइटीशियन का काम किसी भी तरह का फ़ूड प्लान करना होता है। ऐसे प्रोफेशनल किसी भी उम्र के पर्सन के लिए फ़ूड प्लानिंग कर सकते हैं। फ़ूड प्लानिंग का मकसद यही होता है कि आहार  के रूप में जो खाया जाए, वह संतुलित हो और शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अत्यंत फायदेमंद हो। व्यक्ति की जरूरत, उम्र, बीमारी आदि के आधार पर ही फूड प्लानिंग की जाती है।

कोर्स कैसे-कैसे

डायटेटिक्स एंड न्यूट्रिशन के कोर्स ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन, दोनों ही स्तरों के उपलब्ध हैं। कई संस्थानों में डिप्लोमा इन डायटेटिक्स एंड पब्लिक हेल्थ नयट्रिशन (डीडीपीएचन) जैसा एकवर्षीय पीजी डिप्लोमा कोर्स भी है। इसके अलावा फ़ूड साइंस के 4 वर्षीय पाठ्यक्रम में भी एडमिशन ले सकतें है। इस फील्ड में हायर एजुकेशन की भी सुविधा है। आप पीएचडी और रिसर्च जैसे पाठ्यक्रमों में पीजी के बाद जा सकतें हैं। मेडिकल बैकग्राउंड न होने पर भी डाइटीशियन के रूप में कैरियर बनाया जा सकता है। इसके लिए होमसाइंस, फ़ूड टेक्नोलॉजी आदि से रिलेटेड बैकग्राउंड जरूरी है। पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद इस क्षेत्र में बेहतर अवसर मिलते हैं।

एजुकेशनल क्वालीफिकेशन्स

ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन स्तर पर होम साइंस डायटेटिक्स एन्ड न्यूट्रिशन, फ़ूड साइंस जैसे विषयों की पढ़ाई के बाद डाइटीशियन के रूप में कैरियर की रूपरेखा बनाई जा सकती है। बैचलर कोर्स में दाखिला लेने के लिए 12वीं में साइंस विषय जरूरी है। बायोलॉजी/ होम साइंस, फ़ूड साइंस, बायोकेमिस्ट्री, एग्रीकल्चर, डेयरी, कैटरिंग टेक्नोलॉजी, मेडिसन आदि में बैचलर डिग्री रखने वाले स्टूडेंट्स डायटेटिक्स में पीजी कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं।

ऑपर्चुनिटी है यहां

हॉस्पिटल, हेल्थ एन्ड फिटनेस क्लब, होटल, स्कूल, फ़ूड मैनुफैक्चरिंग यूनिट, हेल्थ डिपार्टमेंट आदि जगहों पर ऐसे प्रफेशनल्स की मांग होती है। निजी और सरकारी, दोनों ही क्षेत्रों में  अवसर मिलतें हैं। एक्सपीरिएंस के बाद खुद की प्रैक्टिस से भी कमाई की जा सकती है

मुख्य संस्थान

पीजी डिप्लोमा कोर्स इन डायटेटिक्स, इंस्टिट्यूट ऑफ होम इकोनॉमिक्स, नई दिल्ली
वेबसाइट: www.ihe-du.com/

गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर
वेबसाइट: www.gndu.ac.in/

आल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हाइजीन एन्ड पब्लिक हेल्थ, कोलकाता
वेबसाइट: www.aiihph.gov.in/

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन, हैदराबाद
वेबसाइट: www.ninindia.org/

Thanks
Team Akanksha

Monday, 23 April 2018

वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी: कैरियर के लिए बेहतर विकल्प

आपको फोटोग्राफी का शौक है और साथ में वन्य जीवों व उनके जीवन को करीब से देखने का चाहत रखतें हैं, तो बतौर वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर अपना कैरियर बना सकते हैं। फोटोग्राफी के क्षेत्र में यह उभरता हुआ कैरियर है।

वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी: कैरियर के लिए बेहतर विकल्प

कार्य प्रकृति

प्रोफेशनल वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर का मुख्य काम जंगली जानवरों, पक्षियों आदि की उनके नेचुरल एनवायरमेंट में ऐसी तस्वीरें खींचना है, जिससे लोगों को उन फोटोग्राफों के जरिए वन्य जीव-जंतुओं के बारे में तरह-तरह की जानकारी मिल सके। एक वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर के रूप में कार्य में सतर्कता की बहुत आवश्यकता होती है। इसकी वजह यह है कि वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी में एक छोटे से पल में फोटोग्राफर कमाल की तस्वीर खींच सकता है या इस काम में चूक भी हो सकती है.

पर्सनल स्किल्स

एक प्रोफेशनल वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर को वन्य जीवन की अधिक से अधिक जानकारी होना बेहद आवश्यक है। प्रोफेशनल कैमरे से अच्छी तरह वाकिफ होना चाहिए। इतना ही नहीं, हर स्थिति में बेहतरीन फोटोग्राफी के लिए तकनीकी ज्ञान का होना भी उतना ही आवश्यक है। वाइल्ड लाइफ का सिर्फ स्टूडियो तक ही सीमित नही होता है उसे वन्य जीवों की तस्वीरें उनकी नेचुरल सेटिंग में खींचनी होती हैं। इसलिए उसे हर परिस्थिति में खुद को ढालना आना चाहिए। कई बार एक परफेक्ट शॉट के लिए ऐसे फोटोग्राफर को महीनों तक का भी इंतजार करना पड़ता है। इसलिए धैर्यवान होना भी जरूरी है।

कोर्स कैसे-कैसे

देशभर के विभिन्न संस्थानों द्वारा वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर बनने के लिए अनेक सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स चलाए जाते हैं। आप किसी भी संस्थान से कोर्स करके कैरियर की शुरुआत कर सकते हैं।

अवसर कैसे-कैसे

भारत में वन क्षेत्र की कोई कमी नहीं है। इसलिए इस फील्ड में  स्कोप भी बहुत अधिक है। प्रोफेशनल वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर आमतौर पर न्यूजपेपर, एड एजेंसी, गवर्नमेंट एजेंसी आदि द्वारा मिलने वाले असाइनमेंट पर काम करते हैं। शुरुआतु दिनों में किसी वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर के साथ बतौर ट्रेनी काम की शुरुआत की जा सकती है बाद में कुछ सीखने के बाद खुद ही काम ढूंढकर किया जा सकता है।वाइल्ड लाइफ से रिलेटेड मैगज़ीन्स और डिस्कवरी, वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर की हमेशा बनी रहती है। किसी मीडिया हाउस या एनजीओ के साथ जुड़कर भी काम किया जा सकता है। अनुभव होने पर एग्जीबिशन या फोटोग्राफी कॉम्पटीशन से अपनी अलग पहचान बनाई जा सकती है। इसके अलावा कार्ड्स और कैलेंडर निर्माता कम्पनियों से भी आप काम के लिए सम्पर्क कर सकते हैं।

आमदनी

जिस तरह के भी अवसर आपको मिलतें हैं, आपकी आमदनी भी उसी पर निर्भर करती है। जैसे-जैसे इस क्षेत्र में आपका अनुभव बढ़ता जाएगा, आपकी आमदनी में इजाफा होता जाएगा। नाम होने के बाद तो आपकी कमाई लाखों में पहुंच सकती हैं।

टॉप इंस्टिट्यूटस

वाइल्ड लाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया, देहरादून
वेबसाइट: http://www.wii.gov.in/

दिल्ली स्कूल ऑफ फोटोग्राफी, नई दिल्ली
वेबसाइट: www.delhischoolofphotography.in/

एनआईडी, अहमदाबाद
वेबसाइट: www.nid.edu/

सर जेजे स्कूल ऑफ अप्लाइड आटर्स, मुम्बई
वेबसाइट: http://jjiaa.org/

जवाहर लाल नेहरू टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, हैदराबाद
वेबसाइट:   www.jntuh.ac.in/

Thanks
Team Akanksha




Thursday, 19 April 2018

बायोमेडिकल इंजीनियरिंग में भी हैं मौके अपार


मेडिकल और इंजीनियरिंग का संगम बायोमेडिकल इंजीनियरिंग है।

मेडिकल फील्ड में शोध कार्यों को लेकर चिकित्सा संबंधि कार्यो के विभिन्न उपकरणों की जरूरत होती है। ऐसे ही कार्यो की वजह से बायोमेडिकल इंजीनियरिंग का क्षेत्र विकसित हुआ, ताकि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समाधान किया जा सके। इस फील्ड से संबंधित प्रोफेशनल बायोमेडिकल इंजीनियर कहलाते हैं। इसके अंतर्गत उपचार संबंधी विभिन्न जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अल्ट्रासाउंड मशीन,एक्स-रे तकनीक, कृत्रिम अंग, ऑपरेशन से संबंधित उपकरण आदि तमाम छोटी-बड़ी चीजों का निर्माण किया जाता है, ताकि चिकित्सा के क्षेत्र में सहूुलियत हो। इसमें विभिन्न बीमारियों का पता लगाने वाले उपकरण भी शामिल हैं।



विस्तृत क्षेत्र

बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र को कई उप-श्रेणियों में बांटा जा सकता है। बायो मैकेनिक्स के तहत मोशन, डिफ़ॉर्मेशन, मैटेरियल आदि का अध्ययन किया जाता है, जिसमे वॉल्व, कृत्रिम सिस्टम फिजियोलॉजी में बायो-केमिस्ट्री ऑफ मेटाबॉलिज्म से सम्बंधित अध्ययन किया जाता है।

कोर्स और प्रवेश प्रक्रिया

इस फील्ड में अंडरग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट लेवल के पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। साइंस स्ट्रीम में 12 वीं पास स्टूडेंट अंडरग्रेजुएट स्तर पर एडमिशन ले सकतें हैं। जेईई व अन्य एंट्रेस टेस्ट के जरिये अंडरग्रेजुएट कोर्स में एडमिशन लिया जा सकता है। दाखिले में 12वीं के अंकों को भी महत्व दिया जाता है। बीटेक/ बीई के बाद पीजी लेवल के कोर्स किये जा सकतें हैं।

पर्सनल क्वाल्टीज

स्टूडेंट को इंजीनियरिंग और बायोलॉजी, दोनों में समान रूप से दिलचस्पी होनी चाहिए। चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे बदलावों से भी सजग रहना होगा।

कहां-कहां हैं अवसर

सेहत के क्षेत्र में हो रहे बदलावों और स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियों को देखते हुए इस फील्ड में करियर के अवसर बड़े लेवल पर अवेलेबल है। मेडिकल इंस्ट्रूेंट्स  मेकर्स, फार्मास्युटिकल्स कंपनियां, मेडिसिन मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स आदि में ऐसे प्रोफेशनल्स की नियुक्तियां होती रहती है। इसके अलावा अस्पतालों नर्सिंग होम, रिसर्च लैब जगहों पर भी ऐसे प्रोफेसनल मौके पाते हैं।

सैलरी

इस फील्ड में काम करने वालों का पैकेज काफी अच्छा होता है। शुरुआत में एक्सपीरियंस कम होने की वजह से कम मिलता है लेकिन जैसे-जैसे एक्सपीरियंस बढ़ता जाता है वैसे-वैसे आमदनी बढ़ती जाती है। इस फील्ड के लोगों के लिए गवर्नमेंट सर्विसेज के फील्ड में भी मौके होते है।

इंडिया में खास इंस्टीट्यूटस

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मुम्बई
वेबसाइट: www.iiitb.ac.in

कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, अन्ना युनिवर्सिटी, चेन्नई
वेबसाइट: www.annauniv. edu

बायोमेडिकल इंस्टूमेंटेशन सेंटर, उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद
वेबसाइट: www.Osmaniauniversity.in

इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, बीएचयू
वेबसाइट: www.itbhu.ac.in

Thanks
Team Akanksha

ऑनलाइन ट्यूशन मिल सकतें है इन साइट्स पर



अगर आपके पास समय की कमी है और ट्यूशन के लिए भाग-दौड़ से बचना चाहते हैं, तो ऑनलाइन ट्यूशन बेस्ट ऑप्शन है। आज ऐसे कई ऑनलाइन डेस्टिनेशंस हैं, जहां आप न सिर्फ घर बैठे ऑनलाइन ट्यूशन ले सकते हैं, बल्कि गर्मी की छुट्टियों में कुछ ऑनलाइन कोर्सेज करके अपनी स्किल्स को भी इम्प्रूव कर सकतें हैं...

InstaEDU

ऑनलाइन ट्यूशन के लिहाज से इंस्टाइडु एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। 3000 से ज्यादा कॉलेज स्टूडेंट्स की एक टीम यहां ट्यूशन देने का काम करती है। यहां आप मैथ्स और सांइस से रिलेटेड सब्जेक्ट्स के साथ-साथ एडवांस्ड टॉपिक्स, जैसे- इकोनॉमिक्स, जावा स्क्रिप्ट प्रोग्रामिंग आदि की ऑनलाइन ट्यूशन ले सकतें है। इसके लिए इस साइट पर लॉग-इन करना होगा। जिस सब्जेक्ट से रिलेटेड ट्यूशन लेना चाहते हैं, इंस्टाइडु उससे सम्बंधित टीचर को मैसेज भेजता है। ट्यूटर के साथ मैच होने के बाद आप ऑनलाइन ट्यूटरिंग कर सकतें हैं। ऑनलाइन टयूशन टेक्स्ट, वीडियो चैट और व्हाइट बोर्ड के जरिये होता है। यहां पर आपको होमवर्क अपलोड करने का ऑप्शन भी मिलता है

वेबसाइट: www.chegg.com



Kaplan

अगर आप ग्रेजुएट प्रोग्राम्स, मेडिकल, जीमैट, जीआरई, एलएसएटी-इंडिया, एमकैट आदि में एडमिशन चाहतें हैं, तो इस साइट से आपको मदद मिल सकती है। इससे जुड़े टीचर्स आपको तैयारी में हेल्प करने के साथ गाइडेंस और सपोर्ट भी देते हैं, ताकि आप एग्जाम क्लियर कर सकें। यहां अमेरिकी कॉलेजों में एडमिशन के लिए होने वाले टेस्ट के अलावा, इंग्लिश प्रोग्राम टॉफेल आदि की ट्यूशन ले सकते हैं। इसके अलावा, एलिमेंट्री और मिडिल स्कूल के स्टूडेंट्स भी यहां ट्यूशन ले सकतें हैं।

वेबसाइट:  www.kaptestglobal.com


Prestoexperts

आप पीएचडी स्टूडेंट हों या फिर प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाले स्टूडेंट, आप प्रीस्टोएक्सेपर्ट्स पर अपने लिए आसानी से ट्यूटर खोज सकते हैं। यहां करीब 600 कैटेगरी में 30 हजार से अधिक एक्सपर्ट रजिस्टर्ड हैं। स्टूडेंट्स यहां चैट, फोन, ई-मेल आदि के जरिए भी ट्यूटर से कनेक्ट रह सकते हैं। यहां पर आपको होमवर्क असिस्टेंस, लैंग्वेज, लाइफ साइंसेज, मैथमेटिक्स, केमिस्ट्री, चाइल्ड एजुकेशन, कम्प्यूटर साइंस, अर्थ साइंस, सोशल साइंस, साइंस एंड टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग आदि से जुड़े एक्सपर्ट मिल जाएंगे।

वेबसाइट: www.prestoexperts.com


WizlQ

ऑनलाइन एजुकेशन स्पेस में एक बड़ा नाम है विजआइक्यू। इससे करीब 4 लाख से अधिक टीचर्स और 40 लर्नर कनेक्ट हैं। यहां पर पढ़ाई का तरीका अलग है। एग्जामिनेशन की तैयारी या फिर प्रोग्रामिंग से जुड़े कोर्स की फ्री-रिकॉर्डेड क्लासेज का भी ऑप्शन है। इसके अलावा, स्टूडेंट्स सीधे प्राइवेट टीचर्स के साथ एनरॉल हो सकते हैं। यहां प्राइवेट टीचर इस साइट से जुड़कर प्राइवेट ट्यूटरिंग का बिजनेस भी शुरू कर सकतें हैं। यहां पर कोर्स मैनेजमेंट, वर्चुअल क्लास, टेस्ट असेसमेंट्स, कंटेंट शेयरिंग, एक्सपर्ट्स सपोर्ट आदि का ऑप्शन दिया गया है। यहां आप बिजनेस ऐंड मैनेजमेंट, हेल्थ ऐंड फिटनेस, आईटी ऐंड सॉफ्टवेयर, लैंग्वेज, मैथ, साइंस, सोशल साइंस, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट आदि सब्जेक्ट्स से जुड़े ट्यूशन या फिर क्लास ले सकतें हैं।

वेबसाइट: www.wiziq.com

Sophia


जिन स्टूडेंट्स के पॉकेट खाली है यानी पैसे नहीं हैं, उनके लिए सोफिया ऑनलाइन लर्निंग के लिहाज से एक बेहतरीन डेस्टिनेशन है फ्री ट्यूटोरियल्स की मदद से स्टूडेंट्स ऊनी एकेडेमिक स्किल को बेहतर कर सकतें हैं। यहां पर 6000 से अधिक ट्यूटर्स के 37 हजार से अधिक फ्री ट्यूटोरियल्स हैं होमवर्क हेल्प सेक्शन में इंग्लिश, साइंस, मैथ, फाइन आर्ट्स, सोशल साइंसेज, वर्ल्ड लैंग्वेज, अप्लॉयड साइंसेज से जुड़े कोर्से हैं। इसके अलावा, आप ऑनलाइन कॉलेज भी हासिल कर सकते हैं।

वेबसाइट: www.sophia.com


e-Tutor

ऑनलाइन पढ़ाई करना हो, तो ई-ट्यूटर भी स्टूडेंट्स के लिए एक बेहतर ऑप्शन है। हालांकि, यहां उपलब्ध प्रोग्राम को सब्सक्रिप्शन के आधार पर ही एक्सेस कर पाएंगे। ई-ट्यूटर होम स्कूलर्स, इंटरनेशनल स्टूडेंट्स, हेल्थ इंपेयर्ड के साथ-साथ ऐसे स्टूडेंट्स को अपनी एजुकेशनल स्किल्स को रिफ्रेश करना चाहतें हैं, वे यहां पर उपलब्ध माड्यूल्स का लाभ उठा सकते हैं। लैंग्वेज आर्टस, मैथमेटिक्स, साइंस ऐंड सोशल साइंस और सोशल स्टडीज से जुड़े लेसन दिए गए हैं। इसके करिकुलम नेशनल स्टैंडर्ड के हैं। इसके अलावा, यहां नौ पार्ट्स में लेसन माड्यूल्स हैं, जैसे-स्टडी गाइड, लेशन, रिसोर्सेज, वोकेबुलरी ऐंड सेल्फ करेक्टिंग क्विजेज और एग्जाम। यहां पर दो तरह के प्रोग्राम्स हैं- ई ट्यूटर इंडिपेंडेंस प्रोग्राम और वन-2-वन प्रोग्राम।

वेबसाइट: www.e-tutor.com


Tutor.com

होमवर्क हेल्प से लेकर करियर डेवेलपमेंट तक यह एक ईजी डेस्टिनेशन है। इसकी खासियत है कि एजुकेटर्स यहां 24 घंटे और 7 दिन उपलब्ध होतें हैं। यहां पर मैथ्स, साइंस, इंग्लिश, फॉरेन लैंग्वेज, बिजनेस आदि से रिलेटेड सब्जेस्ट्स को कवर किया जाता है। इसके अलावा, यहां ट्यूटर्स के आर्टिकल्स पढ़ने की सुविधा भी है।

वेबसाइट: www.tutor.com


Growing Stars

यह वन-ऑन-वन ट्यूटरिंग ऑफर करता है। यहां पर अधिकतर टीचर्स के पास मास्टर डिग्री है। इसकी खासियत है कि यहां पर फ़्री होमवर्क हेल्प डेस्क दिया गया है।

वेबसाइट: www.growingstars.com 

eAge

अगर आपको इंग्लिश स्पीकिंग में परेशानी है और पब्लिकली आप इंग्लिश नहीं बोल पातें हैं, तो ईएज की स्पोकेन इंग्लिश ट्यूटरिंग सर्विसेज को ट्राई कर सकते हैं। कोर्स में वोकेबुलरी, लिसनिंग स्किल, कम्युनिकेशन और ग्रामर पर फोकस है।

वेबसाइट: www.eagetutor.com


Thanks
Team Akanksha

Tuesday, 17 April 2018

आवाज में है जादू तो बन सकते है डबिंग आर्टिस्ट

आवाज में है जादू तो बन सकते है डबिंग आर्टिस्ट

अगर आपने काबिल मूवी देखा है तो आपने देखा होगा कि हृतिक रोशन का किरदार एक डबिंग आर्टिस्ट का था। अगर आपके अंदर भी अलग अलग किरदारों के मूड और इमोशन में ढल वाली आवाज है तो एंटरटेनमेंट की इस इंडस्ट्री में बहुत सुनहरा अवसर है


जिस तरह से आज आज कार्टून मूवी, सीरियल, कमर्शियल शोज और एनिमेशन का काम बढ़ रहा है उस हिसाब से इस इंडस्ट्री कम समय मे एक बेहतरीन कैरियर बनाया जा सकता है। इस इंडस्ट्री में आवाज का कोई भी धनी इंसान बतौर वॉयस ओवर या डबिंग आर्टिस्ट टीवी, फ़िल्म और रेडियों में करियर का आगाज कर सकता है।

वर्क प्रोफाइल

एक डबिंग और वॉयस ओवर आर्टिस्ट डॉक्युमेंट्रीज़, टीवी प्रोग्राम्स, ऐड फिल्म्स में अपनी आवाज देतें हैं। हालांकि, इन दोनों कामों में थोड़ा सा अंतर है। जब किसी विजुअल, स्टिल, एडवर्टिजमेंट के साथ आवाज आती है, तो वह वॉयस ओवर आर्टिस्ट की होती है। वहीं, डबिंग आर्टिस्ट सिनेमा, टेलीफिल्म्स आदि लिए काम करते हैं। ऑन स्क्रीन एक्टर या एक्ट्रेस या एनिमेटेड कैरेक्टर्स जब परफार्म करतें हैं, तो उनकी आवाज एक डबिंग आर्टिस्ट ही रिकॉर्ड करता है।

स्किल्स पर फोकस

डबिंग में करियर के लिए इमोशन, टोन, और आवाज पर काफी काम करना होता है। एक सफल डबिंग आर्टिस्ट बनने के लिए सबसे जरूरी है, प्रोफेशन की बारीकियों को समझना। आपको कैरेक्टर्स यानी किरदारों के हावभाव को पढ़ना आन चाहिए, क्योंकि फिर उससे अपनी आवाज को मैच कराना होता है। इस क्रम में आपको बार बार री-टेक भी करने पड़ सकतें है। ऐसे में अपना कॉन्फिडेंस नही खोना चाहिए। गले को ठीक रखने के लिए आपको ठंडी चीजो से परहेज करना होगा।

एलिजिबिलिटी

डबिंग आर्टिस्ट बनने के लिए किसी विशेष एजुकेशन या क्वालिफिकेशन की जरूरत नहीं है। हां, लैंग्वेज पर कमांड जरूर होनी चाहिए। साथ ही, किरदार के अनुसार वॉयस मॉड्यूलेशन करना आना चाहिए। एक वॉयस ओवर आर्टिस्ट को डिक्शन, उच्चारण आदि पर भी कम करना होता है। इंडिया में कुछ ट्रेनिंग इंस्टीट्यूटस एक से तीन महीने का स्पेशलाइज्ड सर्टिफिकेट प्रोग्राम्स और वर्क शॉप आयोजित करते हैं।

एंट्री प्रॉसेस

इस फील्ड में एंट्री के लिए सबसे पहले आपको किसी रिकॉर्डर या कम्प्यूटर पर वॉयस रिकॉर्ड करनी होगी। इसके बाद किसी रिकॉर्डिंग स्टूडियो की मदद से अलग अलग भाषाओं में एक डेमो तैयार करें। इसके बाद प्रोडक्शन हाउस से कॉन्टैक्ट करें, जो समय समय पर ऑडिशन्स ऑर्गनाइज करतें रहतें है। आप चाहे, तो अपना वेब पेज क्रिएट वहां भी अपनी साउंड क्लिपिंग्स अपलोड कर सकतें हैं आजकल लोग ज्यादातर वेबसाइट के जरिये ही डबिंग या वॉयस आर्टिस्ट की हायरिंग कर रहें हैं।



ऑपरट्यूनिटीज

बात चाहे वीडियो गेम्स की हो, ऐप, इंटरनेट पब्लिशिंग की, हर जगह वॉयस ओवर या डबिंग आर्टिस्ट्स की डिमांड देखी जा रही है। फ़िल्म और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में खैर इनकी मांग बढ़ती जा रही है। यहां पर कॉन्ट्रैक्ट बेसिस या फ्रीलांसर की तरह काम किया सकता है
शुरुआत भले ही कम पैसे हो लेकिन डेडिकेशन परफॉर्मेंस और अच्छे ब्रेक्स के साथ कीमत बढ़ जाती है।

डबिंग आर्टिस्ट की जुबानी इसकी कहानी

दोस्तों मैने नॉडी, निन्जा हट्टोरी जैसे जैसे पॉपुलर कैरेक्टर्स के अलावा बॉलीवुड और हॉलीवुड फिल्मों के किरदारों को अपनी आवाज दी है। 25 साल के कैरियर में अब काम थोड़ा स्मूथ हो गया है, निश्चित तौर पर आज भी बहुत चैलेंजिंग है। एक ही आवाज ही नहीं, बल्कि आपको एक बेहतरीन आर्टिस्ट भी होना होगा। आज लोग इसे फुलटाइम कैरियर बना रहे हैं। यदि यह पैशन है तो इंजॉय करें और खूब प्रैक्टिस करें। आप बेशक़ औरों से बेहतर होते जाएंगे और अच्छे ऑफर भी मिलते रहेंगे।

-मेघना एरंडे, डबिंग आर्टिस्ट, मुंबई


-मेघना एरंडे, डबिंग आर्टिस्ट, मुंबई



टॉप इंस्टिट्यूटस

वॉयस ट्रेनिंग सेंटर, मुंबई
www.indian-voice-overs.com/

जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ कम्युनिकेशन, मुम्बई
www.xaviercomm.com/

एशियन एकेडमी ऑफ फ़िल्म एन्ड टेलीविजन,नोएडा
www.aaft.com/

मुंबई फ़िल्म एकेडमी,मुंबई
www.mumbaifilmacademy.com/

आर.के.फिल्म्स ऐंड मीडिया एकेडमी,दिल्ली
www.rkfma.com/

Thanks

Team Akanksha

Friday, 13 April 2018

किताबों का साथ, लीडरशिप की शुरुआत

किताबों का साथ, लीडरशिप की शुरुआत

आत्म साधना का एक महत्वपूर्ण और बेहद आसान तरीका है हर रोज कुछ मोटिवेशनल और मूल्यवान पुस्तकों का अध्ययन. अध्ययन आपको एक नई ऊंचाई प्रदान करता है, क्योंकि ज्ञान ही असली ताकत है। अध्ययन से अनूठे विचार जन्म लेतें
हैं, जो आपको जीवन में बहुमुखी बनाने में सहायक होते हैं। महत्वपूर्ण है, ऐसे विचारों से परिपूर्ण होना जो आपमें सकारात्मक सोच को जन्म देते हैं।  आप स्वयं पर किसी तरह की सीमाएं न लगाएं।


दुनिया में इस तरह की गलतियाँ की जा चुकी हैं, इनका समाधान पुस्तकों में मिलता है। ऐसे में ये गलतियाँ करनी जरूरी है? अब यही करना बाकी रह गया है कि जीवन को आसान बनायें, न कि मुश्किल. पढ़ने की आदत सचमुच में आपके यह कर सकता है। स्वयं को उन्नति के पथ पर आगे ले जाने के लिए अपनी खुद की लाइब्रेरी बनाएं, इसकी शुरुआत इन कुछ किताबों से कर सकतें है


1. थिंक एन्ड ग्रो रिच- नेपोलियन बोनापार्ट

2. द ऑटोबायोग्राफी ऑफ बेन फ्रैंकलिन

3. द पवार ऑफ द सब कांशस माइंड- डॉ. जोसेफ मर्फी

4. द पावर ऑफ पॉजिटिव थिंकिंग-रेव नॉर्मन विंसेट पील

5.  सिद्धार्थ हर्मन हेस

6.  द स्टोरी ऑफ माई एक्सपिरिमेंट्स विद टूथ- महात्मा गांधी

7. ऐज़ ए मैन थिंक्थ- जेम्स एलन

8. द पर्सूट ऑफ हैप्पीनेस- डेविड मेयर्स

9. हाउ टू विन फ्रेंड्स एंड इंफ्लुएंस पीपल- डेल कार्नेगी

10. द मैजिक ऑफ बीलिविंग- क्लाड ब्रिस्टल

11. मेन आर फ्रॉम मार्स, वुमेन आर फ्रॉम व्हिनस- जॉन ग्रे

12. प्रेम की पाँच भाषाएँ

13. लोक-व्यवहार में कुशलता- लेश गिबलिन

14. मित्रता फ महत्व- एलन रॉय

15. पर्सनॉलिटी प्लस- लिटौर

16. सेवन हैबिट्स ऑफ हायली इफेक्टिव पिपुल-  स्टीफन कवी

17. शिखर पर मिलेंगे- जिग जिग्लर

18. स्टॉप थिकिंग स्टार्ट लिविंग- डेल कार्नेगी

19. मुश्किलें हमेशा हारती है, संघर्ष करने वाले जीतते हैं- रोबेर्ट शूलर

20. बड़ी सोच का बड़ा जादू- डेविड जे स्वॉर्ट्ज

21. जीत आपकी-  शिव खेड़ा

22. दुनिया का महान चमत्कार- ऑग मैंडिनो

23. सन्यासी जिसने अपनी सम्पति बेच दी- रॉबिन शर्मा

24. लक्ष्य- ब्रायन ट्रेसी

25. रिच डैड पुअर डैड- रोबर्ट टी. कियोसाकी


Thanks

Team Akanksha

Thursday, 12 April 2018

सम्मान देना सीखें

कुछ लोग दिल से तो अपने आसपास के लोगों का बहुत आदर करतें हैं, पर उनके सामने अपनी भावनाएं प्रदर्शित नहीं कर पाते.

इससे अक्सर ये लगता है उन्हें किसी की परवाह नही है, वे बदमिजाज हैं, जबकि हकीकत में वे अपने करीबियों से बहुत प्रेम करते हैं, अक्सर उनके सम्मान के लिए दूसरों से लड़ भी जाते हैं. नीचे दी गई बातें ऐसे लोगों के लिए मददगार साबित हो सकती है

अपने व्यवहार-हावभाव से शिष्ट दिखें. कोई बात पसंद न आने पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय चुप रहें।

ध्यान से बात सुनें. बीच-बीच में यह दर्शाएं कि आपको उनकी बातें रुचिकर लग रहीं हैं. कई बार बात पर ध्यान न देने से व्यक्ति यह समझता है कि उसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा.

अगर आपसे कोई गलती हो जाए तो तुरंत अपनी गलती के लिए माफी मांगे. इससे विनम्रता दिखेगी.
हमेशा सामने वाले व्यक्ति की सोच और विचारों का सम्मान करें.

Thanks

Team Akanksha

ब्यूटी एक्सपर्ट- पैसे और ग्लैमर वाला कैरियर



आज जैसे-जैसे लग्जरी लाइफ बढ़ रही है वैसे-वैसे कैरियर के नए विकल्प बनते जा रहें हैं। आज  हम आपसे बात करेंगे एक ऐसे कैरियर के बारे में जिसमे न सिर्फ पैसा, ग्लैमर है बल्कि बहुत सारा एन्जॉयमेंट भी है।


ब्यूटी एक्सपर्ट आज हर किसी की जरूरत है चाहे वो जेंट्स या लेडीज हर किसी को अपने चेहरे को तरोताजा और लाइमलाइट में रखने का शौक है।
आइये जानते है एक ब्यूटी एक्सपर्ट बनने किन चीजों को अपने अंदर लाना पड़ता है

चेहरे की समझ
ब्यूटी एक्सपर्ट के अंदर के इस बात की पूरी समझ होनी चाहिए कि कौन सा चेहरा कैसा है क्योंकि गलत चेहरे के टाइप पर गलत ट्रीटमेंट यूज करने से बहुत ज्यादा नुकसान हो सकता है.


कास्मेटिक की अच्छी परख
इस इंडस्ट्री में कॉस्मेटिक की बहुत ज्यादा जरूरत होती है जिस तरह से एक ब्यूटी एक्सपर्ट को चेहरे के बारे में सही ढंग से पता होना चाहिए उसी तरह कॉस्मेटिक की सही ढंग से पहचान होनी चाहिए.


ट्रेनिंग
इसके लिए आप बहुत सारे ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट होते है जो आपको डिप्लोमा कोर्स कराते हैं. लेकिन इस फील्ड में एक्सपीरियंस सब भारी पड़ता है. यहां पर सही समझ सबकुछ होता है.

ग्लैमर का रास्ता
आज एक एक्सपर्ट की मांग एक सेलेब्रिटी की तरह है. जावेद हबीब इसके एक उदाहरण है. यहां पर अपने मन के मालिक होते हैं. अपने हिसाब से अपना चार्ज कर सकतें है. अपने हिसाब से काम का समय निर्धारित कर सकतें है.

इनकम के मौके
इस फील्ड में इनकम के मौके असीमित हैं और मौकों की भरमार है. इस फील्ड में आपका सही हुनर आपको पैसो की कोई कमी नही होने देता है. शुरुआत में आप 15000-20000 रुपये कम सकतें है


Thanks

Team Akanksha

पर्सनल ब्राडिंग पर भी ध्यान दें


आज का टाइम बहुत ज्यादा कम्पटीशन और चैलेंजेस से भरा हुआ है। इस समय सही जॉब सिर्फ आपके अंदर स्किल होने से नही बल्कि एक सही नेटवर्किंग की वजह से भी मिलती है।



इस समय आप खुद एक ब्रांड है और आपका मार्केट आपके घर के बाहर ही शुरू हो जाता है. अगर आप खुद की बेहतर बॉन्डिंग नही करतें तो उन कम्पनियों की तरह आप पीछे हो जाएंगे जो प्रॉडक्ट के अलावा ब्राडिंग पर फोकस नही करती हैं

सही ढंग से  नेटवर्किंग करने वाले इंसान के पास कभी भी जॉब और मौकों की कोई कमी नही होती है इसलिए आज हर बड़े इंसान के पास अपने ढंग का नेटवर्क होता है।
आइये आपके को कुछ टिप्स बतातें है जो आपकी काफी मदद करेंगे पर्सनल करने पर!

आप अपने शहर में अपने फील्ड के लोगों से सीधे मिलकर उनसे जान-पहचान बढ़ा सकतें है इससे उनके सामने आपकी प्रोफाइल हमेशा रहेगी। इसके लिए आप लोकल न्यूजपेपर या चैम्बर ऑफ कॉमर्स की काफी मदद ले सकते हैं।

आप अपने साथ प्रोफेशनल के साथ बढ़ाने के लिए किसी ऐसे ग्रुप को जॉइन कर सकते है जिसमे आपके फील्ड के प्रोफेसनल जातें जैसे लायन्स क्लब, रोटरी क्लब, चैरिटी संस्था, गोल्फ क्लब, पब्लिक सेमिनार आदि।

आप लिंक्डइन पर प्रोफाइल बनाकर बहुत सारे अपने फील्ड के प्रोफेसनल जुड़ सकतें है और उसी फील्ड के बहुत सारी कम्पनीज से भी जुड़ सकतें हैं।

आप अपने शहर या आस-पास के शहर के फील्ड सफल आदमियों से सम्पर्क कर सकते हैं इसके लिए आपको उनको मेल कर सकते हैं। क्योंकि अगर वो उसी फील्ड में सफल है तो कुछ न कुछ आपको सिखा सकतें हैं।

आप सही ढंग से अपने सोशल नेटवर्किंग साइट्स का उपयोग करके भी कर सकते हैं


Thanks

Team Akanksha

Wednesday, 11 April 2018

बैकग्राउंड बनाइये अपनी ताकत



अक्सर छोटे शहर से बड़े शहर आये युवा अपने इनवायरमेंट, पर्सनालिटी और व्यवहार को लेकर परेशान रहतें हैं। उन्हें लगता है कि डिज़ाइनर कपड़ें न पहनने, इंग्लिश ढंग से न बात करने, हाई-फाई बातें न कर पाने की वजह से ऑफिस में भी उन्हें पर्याप्त मौके नहीं मिलते. वे फ्रंटलाइन में नहीं आ पाते। ऐसा सोचना गलत है, क्योंकि


शहरी होने से न तो आपका महत्व बढ़ता है और न ही देहाती होने से आपका कद घटता है. किसी भी जगह आपका काम और व्यक्तित्व आपको महत्व दिलाता है. इसलिए इन सब बातों से परेशान होने की बजाय अपनी पर्सनालिटी को तराशिए और अपनी वर्किंग कैपेसिटी बढाइये. कुछ और बातें हम आपसे शेयर कर रहें इन्हें ध्यान देकर आप बदल सकतें हैं.

सबसे पहले आप भूल जाइए की आप छोटे से शहर स आएं है. आपका पहनावा एवं व्यवहार बड़े शहर के अनुकूल नहीं है. इन बातों से परेशान होने के बजाय छोटे शहर के बैकग्राउंड को अपनी ताकत बनाइये. जैसे अगर आप क्षेत्रीय बोली जानते हैं तो समझिए आप दूसरों से ज्यादा योग्य है. आपके पास अतिरिक्त योग्यता है.

हो सकता है कि ऑफिस में आपके कलीग इकोनॉमिकल रूप से ज्यादा सम्पन्न हों. उनके बेहतर स्थिति से परेशान होने के बजाय अपनी इनकम बढ़ाने पर ध्यान दीजिए. ज्यादा काम कीजिए. खतरे उठाइये और आगे बढिए.

दफ्तर में अपने परिवार की स्थिति के बारे में गलतबयानी न करें. अगर आपके घर कपड़े का व्यापार होता है तो उस पर गर्व के कीजिये और सम्मान के साथ उसके बारे में दूसरों को बताइये.अपने घर के आकार-प्रकार, इंटिरियर के बारे में दूसरों बातचीत करने के बजाय घर के माहौल एवं परिवार से मिले संस्करों की चर्चा कीजिए।

जिस शहर में आप बस रहें है वहां के खानपान एवं पहनावे का सम्मान कीजिए. लेकिन उस आगे अपने खानपान और पहनावे को बेकार न समझिए.

अगर किसी समारोह में आप शामिल हो रहें है तो गर्व से बताइए कि आप अमुक जगह के रहने वालें हैं और वहां की यह खासियत है.

अपने परिवार या शहर के नामचीन लोगों पर गर्व कीजिये, अहंकार नही।

Thanks

Team Akanksha

बातचीत को बनाए प्रभावशाली

बातचीत इस सृष्टि को बढ़ाने में जितना कारगर शायद उतना कुछ नही. बातचीत से ही पता चलता है हम क्या चाहतें है? हमारे अंदर के इमोशन्स क्या हैं? और कहां और किसके साथ हम कम्फर्ट हैं?

सरल भाषा, सहज अंदाज, सही शब्द चयन और आवाज का उचित उतार-चढ़ाव आदि कुछ ऐसी बातें हैं, जिन पर ध्यान देकर आप बातचीत को प्रभावशाली बना सकतें हैं. प्रभावशाली बातचीत लिए कुछ बातें

● बातचीत हमेशा आराम-आराम से और साफ आवाज में करनी चाहिए. न तो जल्दी-जल्दी बोलना चाहिए और न ही जोर-जोर से चिल्लाना चाहिए.

● कम से कम शब्दों में अपनी बात कहनी चाहिए और महत्वपूर्ण बात पर जोर देना चाहिए.

● बहुत कठिन शब्दों का इस्तेमाल नही करना चाहिए. शब्द चयन हमेशा सामने वाले व्यक्ति की समझ के मुताबिक होना चाहिए.

● बात करते समय 'ओह' , 'श....' आदि शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए. यह बातचीत को उसी तरह बेमज़ा करतें हैं, जैसे खाना खातें वक़्त मुंह मे कंकड़ आ जाता है.

● बात को प्रभावशाली बनाने के लिए कोई रिलेटेड कोई छोटा-सा किस्सा या प्रसंग सुना सकते हैं

● कहतें है आंखें झूंठ नही बोलती इसलिए जिस भी व्यक्ति से बात कर रहें है उससे आंख मिलकर बात करनी चाहिए.

● बातचीत के दौरान सहज और विनम्र रहना चाहिए. आक्रामक अंदाज आपसी प्रेम को कम कर देता है.

● सामने वाला व्यक्ति जिस भाषा में सुविधाजनक महसूस करें, उसी में बात करनी चाहिए.

Thanks
Team Akanksha