रोहन को महीने में अक्सर 10 दिन से ज्यादा अलग-अलग शहरों के लिए ट्रेवेल करना पड़ता हैं। क्योंकि उसका बिजनेस अलग शहरों में फैला हुआ है। निकिता भी अक्सर एक शहर से दूसरे शहर अपने कॉलेज के वीकेंड की छुट्टी होने पर जाती है। लेकिन ये दोनों और इनके बहुत सारे लोग बिल्कुल परेशान नही होते है क्योंकि इनके ट्रेवल का सारा जिम्मा इनका ट्रेवल प्लानर देखता है।
टिकट बुकिंग से लेकर ठहरने तक कि व्यवस्था और आपकी यात्रा को सुखद व यादगार बनाने का काम करतें हैं ट्रेवेल प्लानर और ये बढ़ता कारोबार है, क्योंकि इन दिनों काम और सैर-सपाटे के सिलसिले में लोगों का एक से दूसरे शहर आना-जाना भी काफी बढ़ा है। आइए जानते हैं कि क्या है ट्रैवेल प्लानर का काम और इसे कैसे शुरू कर सकतें हैं।
क्या है ट्रैवेल प्लानर का वर्क
आधुनिक भागमभाग वाले इस समय में हर दिन लोगों को कहीं न कहीं की यात्रा की करनी पड़ती है। कभी बिजनेस के सिलसिले में तो कभी किसी कॉन्फ्रेंस या मीटिंग में भाग लेने के लिए, कभी रिश्तेदारों से मिलने के लिए तो कभी छुट्टियों को मनाने के लिए। साल भर लोगों का आना-जाना लगा रहता है। प्लान अक्सर अचानक बनतें हैं, ऐसे में सबसे अधिक मुश्किल कन्फर्म टिकट मिलने में होती है। अगर नई जगह पर जा रहें हैं तो वहां रुकेंगे कहां, कैसी जगह होगी और किस तरीके से मैनेज करेंगे, यह चिंता लगी रहती है। इन सभी परेशानियों की राह को आसान करता है ट्रेवेल प्लानर।
मौके वाली इंडस्ट्री
मेट्रो सिटीज में तो कभी ट्रेवेल प्लानर काम करतें हैं।
लेकिन अभी मीडियम टाइप के शहरों में गिने-चुने ट्रेवेल प्लानर ही काम करतें हैं। ऐसे में स्वरोजगार के रूप में इसे शुरू करके कमाई के भरपूर मौके हैं।
लेकिन अभी मीडियम टाइप के शहरों में गिने-चुने ट्रेवेल प्लानर ही काम करतें हैं। ऐसे में स्वरोजगार के रूप में इसे शुरू करके कमाई के भरपूर मौके हैं।
कैसे कर सकतें है काम
अगर आप में तालमेल बिठाने की कला है तो आप एक ही शहर में बैठे-बैठे बाकी शहरों के होटल, रिजॉर्ट या गेस्ट हाउस संचालक, टूरिस्ट गाइड आदि से बात कर अपने क्लाइंट को बेहतर सुविधा दे सकतें हैं। शुरुआती दिनों में थोड़ी-बहुत मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन काम करते-करते जाएंगे वैसे-वैसे परिचय और पहचान के बाद काम ई-मेल और कॉल पर हो जाएगा।
स्टार्टिंग के दिनों में चाहे तो टिकट बुकिंग से ही काम की शुरुआत की जा सकती है। अपने क्लाइंट को रेलवे टिकट, एयर टिकट और बस टिकट उपलब्ध करा कर आप उस टिकट पर अपना कमीशन ले सकतें हैं। इसके अलावा कुछ बड़े शहरों के रेलवे स्टेशन या बस अड्डे या टूरिस्ट प्लेस के आसपास के गेस्ट हाउस और होटल संचालको से बात कर लें और उनसे क्लाइंट के लिए कमरें और अन्य सुविधाएं अवेलेबल कराने की बात कर लें। क्लाइंट देने पर आप अपना कमीशन फिक्स कर लें या अपने टिकट, होटल, कैब आदि सभी सुविधाओं का एक पैकेज निर्धारित कर लें और अपने क्लाइंट से उस पैकेज का चार्ज लेने के बाद टिकट, होटल आदि सभी सुविधाओं का चार्ज देने के बाद अपना मुनाफा बचा लें।
स्टार्टिंग के दिनों में चाहे तो टिकट बुकिंग से ही काम की शुरुआत की जा सकती है। अपने क्लाइंट को रेलवे टिकट, एयर टिकट और बस टिकट उपलब्ध करा कर आप उस टिकट पर अपना कमीशन ले सकतें हैं। इसके अलावा कुछ बड़े शहरों के रेलवे स्टेशन या बस अड्डे या टूरिस्ट प्लेस के आसपास के गेस्ट हाउस और होटल संचालको से बात कर लें और उनसे क्लाइंट के लिए कमरें और अन्य सुविधाएं अवेलेबल कराने की बात कर लें। क्लाइंट देने पर आप अपना कमीशन फिक्स कर लें या अपने टिकट, होटल, कैब आदि सभी सुविधाओं का एक पैकेज निर्धारित कर लें और अपने क्लाइंट से उस पैकेज का चार्ज लेने के बाद टिकट, होटल आदि सभी सुविधाओं का चार्ज देने के बाद अपना मुनाफा बचा लें।
काम शुरू करने के लिए सबसे पहले एक ऑफिस भले ही वह छोटा हो, जिसमे कम से कम तीन-चार लोगों के बैठने की जगह हो, खोल लें। ऑफिस में एक लैपटॉप या कम्प्यूटर हो जिसमें इंटरनेट कनेशक्शन जरूरी है। इंटरनेट कनेक्शन की वजह से ही आप आसानी से टिकट बुक कर सकेंगे और बाकी शहरों के होटल, उनकी सर्विसेज आदि के बारे में जान पाएंगे, साथ ही ई-मेल या फोन के जरिये उनसे कॉन्टैक्ट स्थापित कर सकते हैं। अगर आप अपनी वेबसाइट बनवा लें और उस पर अपनी सुविधाओं के बारे में अच्छे से विवरण दें और साथ ही अपना हेल्पलाइन नम्बर उपलब्ध करवा दें तो यह आपके बिजनेस को बढ़ाने में बहुत ही सहायक होगा।
मार्केटिंग
छोटे शहरों के लिए यह काम नया है और इसमें कम कम्पटीशन है, लेकिन फिर भी क्लाइंट बनाने के लिए प्रचार-प्रसार करना ही होगा। अपने शहर में प्रचार मटेरियल के जरिये प्रचार कर सकतें हैं। स्टार्टिंग के दिनों में परिचितों से खुद ही बात करके उनको अच्छी सुविधा देने का वादा करें तो बात और भी ज्यादा बन सकती हैं। इसके अलावा डिजिटल मार्केटिंग का सहारा लेकर आप बिजनेस फैला सकतें है ताकि दूसरे शहर से आने वाला इंसान भी आपके बारे में जान सके।
इनकम
इस बिजनेस में इनकम का सारा स्रोत आपके क्लाइंट पर निर्भर करता है। जितने ज्यादा क्लाइंट होंगे उतना ज्यादा पैसा आपके पास आएगा। पर्व त्योहार और छुट्टियों के मौसम में आमदनी बढ़ सकती है। लेकिन अगर ढंग से कम किया जाए छोटे शहर में भी तो भी 15-20 हजार आसानी से कमाए जा सकते।
इस फील्ड में काम करने के लिए कोई विशेष एजुकेशन की जरूरत नही होती है। इस फील्ड में ऐसा कोई भी पर्सन आ सकता है जिसके अंदर लगन हो इस फील्ड में काम करने की।
कुछ जरूरी सॉफ्ट स्किल टिप्स
इस फील्ड कुछ सॉफ्ट स्किल्स का होना बहुत ही जरुरी होता है।
जो इस फील्ड में काम करने के लिए सही मायने में शिक्षा है।
जो इस फील्ड में काम करने के लिए सही मायने में शिक्षा है।
● मिलनसार प्रवृति के साथ कम्युनिकेशन स्किल अच्छी होनी चाहिए। आपका व्यवहार और बातचीत लोगों को पसंद आनी वाली हो।
● लोगो की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहें। उनकी जरूरत और पॉकेट के अनुसार ट्रेवल प्लान करें।
● अपने आस पास के एन्विरोनेमेंट और वर्किंग इंडस्ट्री के बारे में हमेशा अपडेट होते रहें।
● प्रॉब्लम्स पर समय करने के बजाय सॉल्यूशन्स पर ध्यान लगाएं।
● प्रॉब्लम्स पर समय करने के बजाय सॉल्यूशन्स पर ध्यान लगाएं।
Thanks
Team Akanksha
Team Akanksha

Good idea👏👏👏👏👏👏👏
ReplyDelete