Wednesday, 11 April 2018

बैकग्राउंड बनाइये अपनी ताकत



अक्सर छोटे शहर से बड़े शहर आये युवा अपने इनवायरमेंट, पर्सनालिटी और व्यवहार को लेकर परेशान रहतें हैं। उन्हें लगता है कि डिज़ाइनर कपड़ें न पहनने, इंग्लिश ढंग से न बात करने, हाई-फाई बातें न कर पाने की वजह से ऑफिस में भी उन्हें पर्याप्त मौके नहीं मिलते. वे फ्रंटलाइन में नहीं आ पाते। ऐसा सोचना गलत है, क्योंकि


शहरी होने से न तो आपका महत्व बढ़ता है और न ही देहाती होने से आपका कद घटता है. किसी भी जगह आपका काम और व्यक्तित्व आपको महत्व दिलाता है. इसलिए इन सब बातों से परेशान होने की बजाय अपनी पर्सनालिटी को तराशिए और अपनी वर्किंग कैपेसिटी बढाइये. कुछ और बातें हम आपसे शेयर कर रहें इन्हें ध्यान देकर आप बदल सकतें हैं.

सबसे पहले आप भूल जाइए की आप छोटे से शहर स आएं है. आपका पहनावा एवं व्यवहार बड़े शहर के अनुकूल नहीं है. इन बातों से परेशान होने के बजाय छोटे शहर के बैकग्राउंड को अपनी ताकत बनाइये. जैसे अगर आप क्षेत्रीय बोली जानते हैं तो समझिए आप दूसरों से ज्यादा योग्य है. आपके पास अतिरिक्त योग्यता है.

हो सकता है कि ऑफिस में आपके कलीग इकोनॉमिकल रूप से ज्यादा सम्पन्न हों. उनके बेहतर स्थिति से परेशान होने के बजाय अपनी इनकम बढ़ाने पर ध्यान दीजिए. ज्यादा काम कीजिए. खतरे उठाइये और आगे बढिए.

दफ्तर में अपने परिवार की स्थिति के बारे में गलतबयानी न करें. अगर आपके घर कपड़े का व्यापार होता है तो उस पर गर्व के कीजिये और सम्मान के साथ उसके बारे में दूसरों को बताइये.अपने घर के आकार-प्रकार, इंटिरियर के बारे में दूसरों बातचीत करने के बजाय घर के माहौल एवं परिवार से मिले संस्करों की चर्चा कीजिए।

जिस शहर में आप बस रहें है वहां के खानपान एवं पहनावे का सम्मान कीजिए. लेकिन उस आगे अपने खानपान और पहनावे को बेकार न समझिए.

अगर किसी समारोह में आप शामिल हो रहें है तो गर्व से बताइए कि आप अमुक जगह के रहने वालें हैं और वहां की यह खासियत है.

अपने परिवार या शहर के नामचीन लोगों पर गर्व कीजिये, अहंकार नही।

Thanks

Team Akanksha

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